International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160   •   Impact Factor: 9.24

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भारतीय उद्यमिता की परंपरा: ऐतिहासिक दृष्टिकोण से समकालीन स्टार्टअप चुनौतियों का विश्लेषण

Author(s) एम. पार्वती
Country India
Abstract भारत में उद्यमिता की कोई नई अवधारणा नहीं है। यह सदियों से भारतीय समाज की आर्थिक संरचना का अभिन्न अंग रही है। प्राचीन काल के व्यापारिक समुदायों से लेकर आज के डिजिटल स्टार्टअप तक, भारतीय उद्यमिता ने निरंतरता के साथ अपनी यात्रा तय की है। यह शोधपत्र भारतीय उद्यमिता की इसी लंबी परंपरा का ऐतिहासिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है और इसे समकालीन स्टार्टअप चुनौतियों से जोड़ता है। शोधपत्र में चार प्रमुख ऐतिहासिक चरणों की जांच की गई है: प्राचीन एवं मध्यकालीन व्यापारिक परंपराएँ, औपनिवेशिक काल में स्वदेशी उद्यमिता का उदय, स्वतंत्रता के बाद लाइसेंस राज के दौर में उद्यमशीलता के संघर्ष, और 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद उद्यमिता के नए आयाम। इस विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि आज के स्टार्टअप जिन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं—पूंजी की कमी, नियामक जटिलताएँ, बाजार तक पहुँच में कठिनाई—उनके ऐतिहासिक समाधान भारतीय परंपरा में मौजूद रहे हैं। पतंजलि, टाटा, अमूल जैसे स्वदेशी उद्यमों की सफलता की कहानियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि भारतीय मूल्यों और आत्मनिर्भरता की भावना पर आधारित उद्यमिता न केवल व्यावसायिक रूप से सफल हो सकती है, बल्कि सामाजिक प्रभाव भी पैदा कर सकती है । शोधपत्र का निष्कर्ष है कि भारतीय उद्यमिता की परंपरा से सीख लेकर हम समकालीन चुनौतियों का समाधान खोज सकते हैं और 'विकसित भारत @2047' के लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।
Keywords भारतीय उद्यमिता, स्वदेशी आंदोलन, आत्मनिर्भर भारत, स्टार्टअप, लाइसेंस राज, आर्थिक इतिहास, व्यापारिक समुदाय, पतंजलि, अमूल, विकसित भारत
Published In Volume 8, Issue 2, March-April 2026
Published On 2026-03-30
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i02.80919

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