International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160   •   Impact Factor: 9.24

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राज्यपाल और सहकारी संघवाद

Author(s) Shalu Saini
Country India
Abstract यह लेख भारतीय संघीय व्यवस्था में राज्यपाल की भूमिका और सहकारी संघवाद के साथ उसके संबंध का विश्लेषण करता है। संघवाद का मूल उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग, समन्वय और साझेदारी को बढ़ावा देना है, ताकि राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्रभावी रूप से प्राप्त किया जा सके। इस संदर्भ में राज्यपाल को एक संवैधानिक सेतु के रूप में स्थापित किया गया है, जो केंद्र और राज्य के बीच संवाद और संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लेख में राज्यपाल की भूमिका के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पक्षों का विवेचन किया गया है। एक ओर, राज्यपाल संवैधानिक संतुलन बनाए रखने, विधायी प्रक्रिया में नियंत्रण, और संकट की स्थितियों में स्थिरता प्रदान करने में सहायक हो सकता है; वहीं दूसरी और राजनीतिकरण, विवेकाधीन शक्तियों के दुरुपयोग और अनुच्छेद-356 के अनुचित प्रयोग जैसी समस्याएं सहकारी संघवाद की भावना को कमजोर करती हैं।
Keywords राज्यपाल, सहकारी संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध, संवैधानिक सेतु, राजनीतिकरण, संघीय संतुलन, लोकतांत्रिक शासन।
Field Arts
Published In Volume 8, Issue 3, May-June 2026
Published On 2026-06-14

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