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E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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राजस्थान में राज्यपाल मुख्यमंत्री संबंध एवं राज्य राजनीति

Author(s) डॉ. अशोक मूलवानी
Country India
Abstract किसी भी राज्य में राज्यपाल-मुख्यमंत्री संबंध और राज्य राजनीति इस बात पर निर्भर करती है कि उस राज्य में उस समय किस दल या गठबंधन की सरकार बनती है और उसी समय केन्द्र में किस दल और गठबंधन की सरकार है और राज्यपाल के पद पर कौन आसीन है ? अगर संबंधित राज्य में उसी दल या गठबंधन की सरकार है, जिसकी केन्द्र में सरकार है, तो राज्य राजनीति को आज के परिप्रेक्ष्य में केन्द्र या केन्द्रीय नेतृत्व के चारों ओर घूमता हुआ पाते हैं। नेहरू काल में राज्य राजनीति केन्द्रीय नेतृत्व व केन्द्रीय सरकार के चारों ओर ही घूमती हुई दिखाई दी थी, राज्यों के मुख्यमंत्री तक प्रधानमंत्री द्वारा निश्चित किए जाते थे, राज्यीय स्तर पर आंतरिक दलीय मतभेदों तक को केन्द्रीय नेतृत्वकर्त्ता ही सुलझाते थे, आज के संदर्भ में जबकि केन्द्र में श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार है, राज्यपालों की नियुक्ति के अतिरिक्त मुख्यमंत्रियों की नियुक्ति तक केन्द्रीय नेतृत्वकर्त्ताओं की इच्छाओं के अनुरूप ही की जा रही है और पार्टी में अपनी स्थिति मजबूत करने वाले नेताओं को उनकी उम्र और पार्टी में उनकी सेवाओ और निष्ठा के आधार पर प्रत्यक्षतः मुख्यमंत्री बनाकर राज्य राजनीति और विकास को उन्हें सौंपने की बजाए उनको केन्द्रीय सरकार में मंत्री पद या राज्यपाल के पद पर नियुक्ति करके राज्य राजनीति और पार्टी के संगठन व अनुशासन को दिल्ली में बैठे-बैठे नियंत्रित करने की कवायद की जा रही है। उत्तरप्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, हरियाणा, असम, गुजरात, उत्तराखण्ड, ओडिशा, त्रिपुरा, गोवा एवं अरूणाचल प्रदेश आदि राज्यों में विधायक दल के नेता के चुनाव में प्रधानमंत्री ने निर्णायक भूमिका निभाई थी। यहां यह भी अत्यन्त महत्वपूर्ण है कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि राज्यों के राज्यपाल केन्द्र की सिफारिश या इच्छानुसार राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किये जाते हैं और उनके प्रसादपर्यन्त तक ही वे अपने पद पर बने रहते हैं। इसके अलावा राज्यपाल ज्यादातर ऐसे व्यक्तियों को बनाया गया जो किसी दल विशेष के खास व्यक्ति रहे हों, जिनकों की पुरस्कार स्वरूप इस पद को उन्हें भेंट किया गया हो, जबकि हमारे संविधान में राज्यपाल की संवैधानिक भूमिका के बारे में बताया गया है, केन्द्र सरकार के एजेण्ट के रूप में राज्यपाल को नहीं रखा गया है। स्वाभाविक सी बात है, जब राज्यपाल कोई ऐसा व्यक्ति हो जो किसी दल विशेष से संबंधित हो तो वह उसी दल और विचारधारा का ही समर्थन करेगा, निष्पक्ष होकर कार्य नहीं कर सकेगा। दुविधा और विवाद की स्थिति तब आती है जब केन्द्र व राज्य में अलग-अलग दल या गठबंधन की सरकार हो और राज्यपाल व मुख्यमंत्री की विचारधाराएं और पृष्ठभूमि अलग-अलग हों।
Keywords राजस्थान में राज्यपाल मुख्यमंत्री संबंध, केन्द्रीय सरकार की विचारधारा से विपरीत विचारधारा की राज्य में सरकार, राज्यपाल की संवैधानिक अध्यक्ष व केन्द्रीय ऐजेण्ट की भूमिका, राज्यपाल पद का केन्द्रीय राजनीति के अनुरूप प्रयोग, आज्ञाकारी राज्यपाल, राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत तक कार्यकाल, केन्द्र सरकार के परिवर्तन से राज्यों में राज्यपाल का परिवर्तन, राष्ट्रपति शासन, खण्डित जनादेश, पंथनिरपेक्षता के आधार पर राजस्थान में राष्ट्रपति शासन, राज्यपाल पद पर भूतपूर्व मुख्यमंत्रियों लोकसेवा आयोग सदस्यो, भूतपूर्व न्यायाधीशों, सत्तारूढ़ दल के अनुपयोगी नेताओं को राज्यपाल पद उपहार स्वरूप दिया जाना, प्रधानमंत्री द्वारा राज्यों के मुख्यमंत्रियों का चयन एवं राज्य राजनीति का केन्द्र के चारों ओर घूमना
Field Arts
Published In Volume 7, Issue 6, November-December 2025
Published On 2025-11-10
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i06.82327

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