International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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संग्रहालय प्रदर्शनी : एक समीक्षात्मक अध्ययन

Author(s) डॉ. श्याम प्रकाश
Country India
Abstract संग्रहालय प्रदर्शनी, संग्रहालय जनसम्पर्क का एक महत्वपूर्ण अंग है। प्रदर्शनियों का आयोज़न दुर्लभ प्रदर्शों को आम जनमानस तक पहुँचाने के लिए किया जाता है। कभी-कभी अलग अलग भारतीय संग्रहालय अथवा विदेशी संग्रहालयों से भी प्रदर्शों अथवा कलावस्तुओं को मंगाकर प्रदर्शनियों में प्रदर्शित किया जाता है। प्रदर्शनियाँ वस्तुतः तीन प्रकार - स्थाई, अस्थाई एवं सचल प्रकार की होती हैं। सभी का अपना अलग-अलग महत्व है। संग्रहालय के क्रिया कलापों में प्रदर्शों को प्रदर्शित करने की अनेक विधियाँ बतायी गई हैं जिन्हें प्रदर्शनी प्रबन्धन भी कहा जा सकता है। संग्रहाध्यक्ष, संग्रहपाल, रूपसज्जाकार आदि मिलकर किसी भी प्रकार की प्रदर्शनी के प्रबन्धन (मैनेज़मेन्ट) का कार्य देख़ते हैं। इसमें कलाकृतियों के सुरक्षित रखरखाव, डिज़ाइन एवं ले आउट, प्रसार और विपणन, बजट आवंटन, आगंतुक अनुभव, और शैक्षिक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए क्यूरेटर और डिजाइनरों के बीच समन्वय से लेकर स्थान, प्रकाश, शो-केस निर्माण, नाम-पत्र आदि का महत्वपूर्ण योगदान होता है।
प्रस्तुत शोध-पत्र में भारत एवं विश्व के सुप्रसिद्ध संग्रहालयविदों की पुस्तकों एवं उनके संदर्भों के आधार पर प्रदर्शनियों के विभिन्न प्रकारों उनमें संचालित क्रिया-कलापों, उनके गुण-दोषों सहित संग्रहालय प्रदर्शनी प्रबन्धन से सम्बन्धित तथ्यों पर प्रकाश डालने का प्रयास किया गया है। यह शोध-पत्र संग्रहालय विज्ञान में कार्य करने वाले शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकता है।
Keywords प्रदर्शनी, पुरावशेष, दिल्ली, स्थाई, अस्थाई, सचल, शो-केस, प्रकाश, नाम-पत्र, रूपसज्जाकर, संग्रहाध्यक्ष, संग्रहपाल आदि।
Field अन्य
Published In Volume 8, Issue 4, July-August 2026
Published On 2026-07-03
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i04.82998

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