International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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डिजिटल युग में पाठकीय चेतना पर प्रभाव- हिंदी साहित्य के संदर्भ में

Author(s) Dr. Jyotsana Swarnkar
Country India
Abstract डिजिटल युग ने सूचना के उत्पादन, वितरण और उपभोग के पारंपरिक ढाँचों में आमूल-चूल परिवर्तन किया है। हिंदी साहित्य के संदर्भ में यह परिवर्तन विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जहाँ डिजिटल माध्यमों ने पाठक और साहित्य के बीच के संबंधों को पुनर्परिभाषित किया है। यह शोधपत्र डिजिटल युग में हिंदी साहित्य के पाठकों की चेतना में आए परिवर्तनों का विश्लेषण करता है। अध्ययन में पाया गया कि डिजिटल माध्यमों ने साहित्य की सुगम्यता, अंतःक्रियाशीलता और वैश्विक उपलब्धता को तो बढ़ाया है, किंतु साथ ही गहन पठन, चिंतनशीलता और साहित्यिक संवेदना में कमी की चुनौती भी प्रस्तुत की है। पाठकीय चेतना अब केवल निष्क्रिय ग्रहण न रहकर सक्रिय सहभागिता की ओर अग्रसर हुई है, जहाँ पाठक टिप्पणी, साझाकरण और पुनर्लेखन के माध्यम से साहित्यिक अर्थ-निर्माण की प्रक्रिया में प्रत्यक्ष भागीदार बन गया है। यह शोध पाठक-प्रतिक्रिया सिद्धांत, शैलोइंग परिकल्पना तथा डिजिटल मीडिया सिद्धांतों के आलोक में हिंदी साहित्य की पाठकीय चेतना में इस आमूल-चूल परिवर्तन की व्याख्या प्रस्तुत करता है।
Keywords पाठकीय चेतना, डिजिटल युग, हिंदी साहित्य, ई-पठन, गहन पठन, पाठक-प्रतिक्रिया सिद्धांत, सोशल मीडिया, साहित्यिक संवेदना, डिजिटल साक्षरता, पठन संस्कृति
Published In Volume 7, Issue 3, May-June 2025
Published On 2025-06-07
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i03.83184

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