International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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बैराठ में बौद्ध पर्यटन सर्किट की संभावनाएँ और चुनौतियाँ: एक व्यावहारिक विश्लेषण

Author(s) TARA CHAND MEENA
Country India
Abstract राजस्थान के कोटपूतली -बहरोड़ जिलेमें ((पहले जयपुर जिले में ) स्थित ऐतिहासिक स्थल बैराठ (विराट नगर) अपने समृद्ध मौर्यकालीन और बौद्ध इतिहास के कारण वैश्विक बौद्ध पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख केंद्र बनने की अपार संभावनाएँ रखता है। यहाँ स्थित बीजक की पहाड़ी पर सम्राट अशोक के भाब्रू शिलालेख और भारत के सबसे प्राचीन गोलाकार बौद्ध स्तूप व चैत्यगृह के अवशेष इसके ऐतिहासिक महत्व को प्रमाणित करते हैं। व्यावहारिक धरातल पर, बैराठ की भौगोलिक स्थिति 'स्वर्णिम त्रिभुज' (दिल्ली-जयपुर-आगरा) के अत्यंत निकट होने के कारण इसे एक बड़े अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटन सर्किट (जैसे उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रमुख बौद्ध स्थलों) से जोड़ना काफी सुगम है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को भारी बढ़ावा दे सकता है। हालाँकि, इन संभावनाओं के मार्ग में कई गंभीर चुनौतियाँ भी मौजूद हैं। वर्तमान में यह स्थल बुनियादी पर्यटन बुनियादी ढांचे (जैसे उच्च स्तरीय आवास, परिवहन कनेक्टिविटी और स्वच्छ सार्वजनिक सुविधाओं) की भारी कमी से जूझ रहा है। इसके अतिरिक्त, पुरातात्विक अवशेषों के संरक्षण का अभाव, आक्रामक खनन गतिविधियाँ, और वैश्विक स्तर पर इस स्थल की प्रभावी मार्केटिंग व ब्रांडिंग न होना इसकी प्रगति को बाधित करता है। प्रस्तुत विश्लेषण यह निष्कर्ष निकालता है कि यदि सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और निजी हितधारक मिलकर एक एकीकृत विकास योजना लागू करें—जिसमें विरासत संरक्षण के साथ-साथ डिजिटल गाइडेंस और सतत पर्यटन को प्राथमिकता दी जाए—तो बैराठ को वैश्विक बौद्ध तीर्थयात्रियों के लिए एक अनिवार्य और आकर्षक गंतव्य के रूप में स्थापित किया जा सकता है।
Keywords मुख्य शब्द: बैराठ (विराट नगर), बौद्ध पर्यटन सर्किट, सम्राट अशोक स्तूप, पुरातात्विक संरक्षण, पर्यटन बुनियादी ढांचा, राजस्थान पर्यटन।
Field Sociology > Archaeology / History
Published In Volume 8, Issue 4, July-August 2026
Published On 2026-07-14
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i04.83712

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