International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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मुंडारी कवि दुलाय चंद्र मुंडा की कविताओं में सौंदर्य-बोध

Author(s) Mr. Mangal Munda
Country India
Abstract सारांश:
मुंडारी कवि दुलाय चंद्र मुंडा आधुनिक पीढ़ी मुंडारी भाषा साहित्य के सुप्रसिद्ध साहित्य निर्माता और जाने-माने कवि हैं। दुलाय चंद्र मुंडा को मुंडारी भाषा साहित्य के नवयुगीन काव्य-धारा के अग्रणी कवि माने जाते हैं। उनकी अपनी दो प्रमुख काव्य-संग्रह ‘सुड़ा-संगेन’(नव पल्लव, 1966) और ‘बम्बरू’(मशाल, 1978) मुंडारी कविताओं का संग्रह हैं, जिनका उन्होंने हिंदी में अनुवाद, कर आदिवासी समाज के भाषा प्रेमियों के लिए अत्यधिक सरल और लोकप्रियता बना दिया है। उनके दोनों काव्य-संग्रहों में सौंदर्य-बोध, आदिवासियों की परंपरिक जीवनशैली, संस्कृति, प्रकृति सामूहिक चेतना का मार्मिक दृश्य देखने को मिलता है। उनकी काव्य रचनाओं में बाह्य प्राकृतिक सौंदर्य तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सम्पूर्ण आदिवासी समुदायों की जीवनशैली, संघर्ष, लोक-आस्था, सामाजिक परंपराएं, संबंधों और सांस्कृतिक अस्मिताओं को भी गहराई से जोड़ने का कार्य करती है। इसके साथ ही उन्होंने अपने आदिवासी समुदायों की चिंताओं को भी अपने शिल्प कला के माध्यम से प्रस्तुत कर अपनी महत्ता स्थापित करती है। और अपने कविताओं के माध्यम से अपने आदिवासी समुदायों को बदलते समयानुसार आगे बढ़ते हुए अपनी मूल संस्कृति की रक्षा के लिए आधुनिक पीढ़ी के युवक-युवतियों को प्रेरित करता है। दुलाय चंद्र मुंडा की कविताओं में बहुलता से सौंदर्य-बोध, आदिवासी दर्शन, प्राकृतिक जुड़ाव और सामुदायिक चेतना की झलक देखने को मिलती है।
Keywords बीज शब्द: दुलाय चंद्र मुंडा, मुंडारी कविता, संस्कृति, प्रकृति, सौंदर्य-बोध।
Field आर्ट्स एक
Published In Volume 8, Issue 4, July-August 2026
Published On 2026-07-28
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i04.83968

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