International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

A Widely Indexed Open Access Peer Reviewed Multidisciplinary Bi-monthly Scholarly International Journal

Call for Paper Volume 8, Issue 4 (July-August 2026) Submit your research before last 3 days of August to publish your research paper in the issue of July-August.

संताली नाटक का उद्भव और विकास : एक अध्ययन

Author(s) Mr. Guna Hembrom
Country India
Abstract साहित्य समाज का दर्पण है। साहित्यिक दर्पण में ही समाज का वास्तविक स्वरूप स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। नाटक भी साहित्य का दर्पण है। इसलिए नाटक में समाज के अच्छी- अच्छी चीजें पाई जाती हैं। नाटक सामाजिक एकता को बनाए रखने, कुरीतियों को समाप्त करने, संस्कृति को संरक्षित करने और भाषा को प्रसार करने का एक बेहतरीन तरीका है। नाटक, साहित्य का एक अभिन्न हिस्सा है। साहित्य में नाटक ही सर्वश्रेष्ठ है। साहित्यिक विधाओं में समकालीन लेखकों ने विभिन्न पात्रों द्वारा सामाजिक, परंपराओं, जातीयता, धर्म, रीति-रिवाजों और विचारों को एक ही कहानी के माध्यम से व्यक्त करने की कोशिश की हैं। जो नाटक के द्वारा ही संभव हो सकता है। हैं। संताली भाषा में नाटक को ‘गायान’ कहा जाता हैं।
Keywords संताली, साहित्य, नाटक, समाज, उद्भव, विकास।
Field Arts
Published In Volume 8, Issue 4, July-August 2026
Published On 2026-07-27
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i04.84312

Share this