International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160   •   Impact Factor: 9.24

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सतनाम सद्भावना पदयात्रा : सामाजिक समरसता, मानव कल्याण और एकता का प्रतीक - एक विवेचनात्मक अध्ययन

Author(s) Mr. Lekhraj Mandley, Dr. Anamika Sharma
Country India
Abstract भारतीय संत परंपरा ने सामाजिक सुधार और आध्यात्मिक जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। छत्तीसगढ़ की संत परंपरा में गुरु घासीदास का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके द्वारा प्रतिपादित ‘सतनाम’ का सिद्धांत सत्य, समानता और मानवीय गरिमा पर आधारित है। सतनाम सद्भावना पदयात्रा इसी दर्शन को जन-जन तक पहुँचाने का एक सामाजिक-आध्यात्मिक माध्यम है। पदयात्रा भारतीय परंपरा में सामाजिक जागरण का प्रभावी माध्यम रही है। महात्मा गांधी ने भी पदयात्राओं के माध्यम से जनचेतना जगाई। उसी परंपरा में सतनाम सद्भावना पदयात्रा सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना का अभियान है। इस पदयात्रा के दौरान भजन, पंथी नृत्य, सतनाम वाणी, प्रवचन, जनसंवाद और सामाजिक संदेशों का प्रसार किया जाता है। इसका उद्देश्य केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक सुधार है। यह सिर्फ आम लोगों की यात्रा नहीं थी. इसे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जैसे बड़े नेताओं का भी समर्थन मिला. उन्होंने इस यात्रा का शुभारंभ किया था. कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने इसका नेतृत्व किया तथा सक्रिय रूप से शामिल थे। इसका मतलब है कि सरकार और समाज, दोनों ने मिलकर इस नेक काम को आगे बढ़ाया। यह यात्रा सिर्फ चलना नहीं था, बल्कि यह लोगों को एकजुट करने, समाज में प्रेम और समानता का बीज बोने का एक बड़ा प्रयास था। इसने गुरु घासीदास बाबा के पुराने लेकिन हमेशा प्रासंगिक संदेश को आज के समाज में फिर से जीवंत कर दिया।
प्रस्तुत शोध-पत्र में सतनाम पंथ की पृष्ठभूमि, पदयात्रा की वैचारिक सिद्धांतों ,उद्देश्यों, सामाजिक प्रभावो तथा समकालीन प्रासंगिकता का विवेचनात्मक अध्ययन किया गया है।
Keywords गुरु घासीदास, सतनाम, सद्भावना, मनखे-मनखे, समरसता, जैतखाम, प्रबुद्धजन, भण्डारपुरी,
Field Sociology > Archaeology / History
Published In Volume 8, Issue 4, July-August 2026
Published On 2026-07-27

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