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E-ISSN: 2582-2160   •   Impact Factor: 9.24

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सांभर झील क्षेत्र में मृदा स्वास्थ्य, मृदा लवणता एवं भूमि क्षरण का भौगोलिक अध्ययन: सतत मृदा प्रबंधन की संभावनाएँ

Author(s) डॉ. ओम प्रकाश
Country India
Abstract सांभर झील राजस्थान के अर्ध-शुष्क प्रदेश में स्थित एक विशिष्ट अंतर्देशीय, उथली एवं लवणीय आर्द्रभूमि है, जिसका महत्व केवल नमक उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय पारिस्थितिकी, जैव-विविधता, स्थानीय आजीविका तथा कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। सांभर झील और इसके आसपास के क्षेत्र में सीमित वर्षा, उच्च वाष्पीकरण, मौसमी जल उपलब्धता, मृदा लवणीकरण, भूमि-उपयोग परिवर्तन, कृषि विस्तार, नमक उत्पादन, जल-निकासी में परिवर्तन तथा मानवीय दबाव जैसी प्रक्रियाएँ मृदा एवं भूमि संसाधनों की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती हैं। उपलब्ध अध्ययन सांभर क्षेत्र में मृदा लवणीकरण, गाद जमाव, जल-गुणवत्ता में परिवर्तन तथा भूमि-उपयोग संबंधी दबावों को प्रमुख पर्यावरणीय चुनौतियों के रूप में रेखांकित करते हैं।प्रस्तुत शोध का उद्देश्य सांभर झील क्षेत्र में मृदा स्वास्थ्य, मृदा लवणता तथा भूमि क्षरण की भौगोलिक स्थिति का अध्ययन करना तथा सतत मृदा प्रबंधन के लिए उपयुक्त रणनीतियों का प्रस्ताव करना है। अध्ययन में GIS एवं Remote Sensing तकनीकों के माध्यम से भूमि उपयोग/भूमि आवरण, वनस्पति, जल क्षेत्र, कृषि भूमि तथा संभावित लवणीय क्षेत्रों का स्थानिक विश्लेषण प्रस्तावित किया गया है। इसके साथ ही मृदा pH, विद्युत चालकता (EC), जैविक कार्बन तथा अन्य उपलब्ध मृदा-गुणवत्ता संकेतकों को सम्मिलित कर मृदा स्वास्थ्य का मूल्यांकन किया जा सकता है। अध्ययन का प्रमुख निष्कर्ष यह है कि सांभर क्षेत्र में मृदा प्रबंधन को केवल कृषि उत्पादकता के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि झील, जलग्रहण क्षेत्र, कृषि भूमि, नमक उत्पादन क्षेत्र तथा स्थानीय समुदाय के परस्पर संबंधों को ध्यान में रखते हुए एकीकृत पारिस्थितिकी-आधारित दृष्टिकोण से देखा जाना आवश्यक है।
Keywords सांभर झील, मृदा स्वास्थ्य, मृदा लवणता, भूमि क्षरण, GIS, Remote Sensing, सतत मृदा प्रबंधन, भूमि उपयोग, राजस्थान।
Published In Volume 8, Issue 4, July-August 2026
Published On 2026-08-21
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i04.86377

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