International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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आधुनिक हिंदी प्रेम कहानियों के बदलते स्वरूप

Author(s) Birendra Kisku
Country India
Abstract कोई भी साहित्यकार अपने समय व समाज की परिस्थितियों के साथ सामंजस्य बनाते हुए रचनायें करता है । साहित्य हो या सिनेमा सृजन के ये सभी क्षेत्र एक तरफ़ तो समाज से प्रभावित होते हैं और समाज को प्रभावित करते हैं । साहित्यकार का ग्रहणशीलता और सृजनशीलता से गहरा संबंध होता है । अपने समाज और परिवार से वो ग्रहण करते हैं और वही देने की सामर्थ्य रखते हैं । अतः हम इन सबके बावजूद भी प्रेम को निर्विकार रह जाने की उम्मीद कैसे करते । तात्पर्य है , इस कारण प्रेम का स्वरूप बदला है । प्रेम तो समाज सापेक्ष होती है और इसलिए प्रेम कहानियाँ भी समाज सापेक्ष होती है ।

बीसवीं शताब्दी के आरम्भ से ही हिंदी साहित्य में गद्य लेखन की परंपरा चल पड़ी थी । इसके बाद हिंदी साहित्य में प्रेम कथाओं पर कई कहानियाँ तथा उपन्यास की रचनायें हुई । देवकीनंदन खत्री के अनमोल कृति चंद्रकांता संतति में राजा राजकुमारों की प्रेम कथाओं के साथ तिलिस्म ऐयारी की कहानियाँ गढ़ी गई और तब से लेकर हिंदी कथा साहित्य ने सौ वर्ष के सोपान को पार कर चुकी । इसके साथ हिंदी कहानियों में प्रेम का स्वरूप भी बदला है ।
Keywords प्रेम कथा, प्रेम कहानी , उसने कहा था , त्याग और समर्पण , आदर्श प्रेम कहानी , असफल प्रेम
Published In Volume 8, Issue 5, September-October 2026
Published On 2026-09-14

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