International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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नागरिक समाज और सांस्कृतिक आधिपत्य: एंटोनियो ग्राम्शी के हेजेमनी सिद्धांत की समकालीन भारतीय राजनीति और मीडिया विमर्श में प्रासंगिकता

Author(s) Mr. Sourabh Sahu
Country India
Abstract यह शोध-पत्र इतालवी मार्क्सवादी विचारक एंटोनियो ग्राम्शी (Antonio Gramsci) के 'सांस्कृतिक आधिपत्य' (Cultural Hegemony) के सिद्धांत का उपयोग करते हुए समकालीन भारतीय राजनीति और मीडिया विमर्श का एक आलोचनात्मक एवं सैद्धांतिक विश्लेषण करता है। पारंपरिक मार्क्सवाद जहाँ सत्ता को केवल आर्थिक आधार (Base) और बल-प्रयोग के रूप में देखता था, वहीं ग्राम्शी ने स्पष्ट किया कि आधुनिक पूँजीवादी राज्य 'नागरिक समाज' (Civil Society) के माध्यम से 'सहमति' (Consent) का निर्माण करके अपना प्रभुत्व स्थापित करते हैं। इस विस्तृत शोध अध्ययन में इस बात की गहन पड़ताल की गई है कि कैसे समकालीन भारत में राजनीतिक विमर्श और मुख्यधारा का मीडिया एक ऐसा 'सामान्य बोध' (Common Sense) गढ़ रहे हैं, जो सत्ताधारी विचारधारा को प्राकृतिक और अपरिहार्य के रूप में स्थापित करता है। इसके अतिरिक्त, यह पत्र 'जैविक बुद्धिजीवी' (Organic Intellectuals) और 'स्थिति का युद्ध' (War of Position) जैसी ग्राम्शियन अवधारणाओं के माध्यम से भारत में प्रति-आधिपत्य (Counter-hegemony) की संभावनाओं का भी मूल्यांकन करता है।
Keywords सांस्कृतिक आधिपत्य, नागरिक समाज, सहमति का निर्माण, सामान्य बोध, जैविक बुद्धिजीवी, स्थिति का युद्ध, भारतीय मीडिया विमर्श, नव-उदारवाद।
Field Sociology
Published In Volume 8, Issue 5, September-October 2026
Published On 2026-09-07
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i05.87315

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