International Journal For Multidisciplinary Research
E-ISSN: 2582-2160
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Volume 8 Issue 5
September-October 2026
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गौरवशाली अतीत, उपेक्षित वर्तमान: बंजारा समुदाय की बदलती पहचान और समकालीन चुनौतियाँ
| Author(s) | Prof. Dr. Lalith Kumar Dharavath |
|---|---|
| Country | India |
| Abstract | सार: यह शोध पत्र बंजारा समुदाय के समृद्ध व्यापारिक इतिहास और ऐतिहासिक गौरव का विश्लेषण करते हुए, आधुनिक भारत में उनके सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन, पहचान के संकट और समकालीन चुनौतियों को रेखांकित करता है। प्रस्तुत शोध पत्र भारत के विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों में प्रमुख स्थान रखने वाले बंजारा समुदाय के ऐतिहासिक गौरव और उनके वर्तमान सामाजिक-आर्थिक संकट का एक आलोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। ऐतिहासिक रूप से, बंजारा समुदाय अपनी अनूठी सांस्कृतिक पहचान, व्यापारिक कुशलता और दुर्गम मार्गों पर परिवहन व्यवस्था के माध्यम से देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहा है। मुगल काल से लेकर ब्रिटिश काल के प्रारंभिक दौर तक देश के आंतरिक व्यापार में इनकी भूमिका अत्यंत गौरवशाली रही। किंतु, औपनिवेशिक काल में ब्रिटिश सरकार द्वारा लागू किए गए 'आपराधिक जनजाति अधिनियम (Criminal Tribes Act, 1871)' और रेलवे के विस्तार ने इस समृद्ध समुदाय को हाशिए पर धकेल दिया। यह शोध दर्शाता है कि स्वतंत्रता के पश्चात भी इस समुदाय का वर्तमान अत्यंत चिंताजनक और चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। आधुनिक युग में स्थायी आवास का अभाव, निरक्षरता, तीव्र आर्थिक तंगी, सांस्कृतिक विलोपन और सामाजिक मुख्यधारा से अलगाव इनके 'शर्मनाक वर्तमान' या गहरे संकट को रेखांकित करते हैं। प्राथमिक और माध्यमिक स्रोतों पर आधारित यह अध्ययन [यहाँ अपने अध्ययन का क्षेत्र लिखें, जैसे: तेलंगाना/राजस्थान/महाराष्ट्र] के बंजारा समाज की वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन करता है। निष्कर्ष बताते हैं कि उचित सरकारी नीतियों, भूमि अधिकारों और शैक्षणिक सुधारों के बिना इस समुदाय के ऐतिहासिक गौरव को पुनर्स्थापित करना और इनके वर्तमान संकट को दूर करना संभव नहीं है। यह पत्र बंजारा समुदाय के समग्र उत्थान और नीतिगत समावेशन के लिए कुछ व्यावहारिक सुझाव भी प्रस्तावित करता है। |
| Keywords | मुख्य शब्द (Keywords): बंजारा समुदाय, ऐतिहासिक गौरव, विमुक्त जनजाति (DNTs), सामाजिक-आर्थिक संकट, पहचान का विस्थापन, समकालीन चुनौतियाँ। |
| Field | Sociology > Politics |
| Published In | Volume 8, Issue 5, September-October 2026 |
| Published On | 2026-09-08 |
| DOI | https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i05.87380 |
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E-ISSN 2582-2160
CrossRef DOI prefix of IJFMR is 10.36948/ijfmr
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