International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी एवं युवा राजनीति का रचनात्मक शक्ति पर प्रभाव

Author(s) Prof. Gopal Prasad, Mr. Rohit Kumar Singh, Mr. Vishal Gupta
Country India
Abstract विश्व में भारत की पहचान सबसे युवा देश के रूप है तथा उत्तर प्रदेश अपनी विशाल युवा आबादी के कारण देश की सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाये हुए है। युवा शक्ति को किसी भी समाज का भविष्य, विकास, नवाचार, सामाजिक एवं राजनीतिक परिवर्तन का वाहक माना जाता है, किन्तु जब यही युवा वर्ग बेरोजगारी, शासकीय उदासीनता, असमान अवसर, संसाधनों की पहुंच से दूर, भर्ती प्रक्रियाओं में विलंबन एवं परीक्षा अनियमितताओं आदि समस्याओं से पीड़ित रहता है, तब ऐसे में उसकी ऊर्जा सामाजिक एवं राजनीतिक असंतोष, राजनीति के ध्रुवीकरण, अलगाव, निराशा एवं कुंठा में परिवर्तित हो जाती है। ऐसी स्थिति में न सिर्फ देश का आर्थिक विकास अवरुद्ध होता है, बल्कि सामाजिक गतिशीलता, राजनीतिक आधुनिकीकरण एवं विकास को भी आघात पहुँचता है। इस प्रकार, बेरोजगारी न सिर्फ एक आर्थिक समस्या है, बल्कि यह सामाजिक बेरोजगारी एवं राजनीतिक बेरोजगारी को जन्म देता है। प्रस्तुत शोध-पत्र उत्तर प्रदेश के विशेष संदर्भ में, बेरोजगारी का आर्थिक एवं सामाजिक दुष्प्रभाव की अपेक्षा राजनीतिक दुष्प्रभाव पर अध्ययन प्रस्तुत करता है अर्थात यह लेख ‘बेरोजगारी का राजनीतिक समाजशास्त्रीय या ‘राजनीतिक व्यवहारवादी’ अध्ययन प्रस्तुत करता है। साथ ही चूंकि बेरोजगारी का संबंध युवाओं से हैं, ऐसे में प्रदेश की युवा राजनीति के स्वरूप का अध्ययन करते हुए इन दोनों पहलुओं का प्रदेश के रचनात्मक शक्ति पर पडऩे वाले प्रभाव का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इस अध्ययन के माध्यम से इस बात को रेखांकित करने का प्रयास किया गया है कि बेरोजगारी केवल आर्थिक समस्या नहीं बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था एवं नागरिक समाज की रचनात्मक शक्ति से जुड़ा हुआ प्रश्न भी है। यह अध्ययन साहित्य समीक्षा के माध्यम से रचनात्मक शक्ति का बेरोजगारी एवं युवाओं की सक्रियता से संबंधी अध्ययन एवं प्रदेश में छात्र केंद्रित राजनीति के ऐतिहासिक संदर्भ, हाल के वर्षों में राज्य में हुए विभिन्न युवा केन्द्रित जन आंदोलन, बेरोजगारी से उत्पन्न मानसिक असंतोष एवं विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक आंदोलनों का अध्ययन करते हुए उसका विश्लेषण प्रस्तुत करता है। प्रस्तुत अध्ययन गुणात्मक प्रकार का है एवं द्वितीय स्रोतों पर आधारित आधारित है, इसमें स्रोत के रूप में विभिन्न सरकारी एजेंसियों, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों, नीति आयोग, गैर सरकारी संगठनों के आंकड़ों, शोध-पत्र, समाचार-पत्र, युवा आंदोलन केन्द्रित साहित्य एवं रचनात्मक शक्ति की अवधारणा को समझने के लिए विभिन्न विद्वानों के पाठ्यपुस्तकों को शामिल किया गया है।
Keywords रचनात्मक शक्ति, बेरोजगारी, युवा राजनीति, लोकतंत्र, नागरिक समाज, सामूहिक कार्रवाई, उत्तर प्रदेश, राजनीतिक गतिशीलता, राजनीतिक उद्यमिता।
Field Sociology > Politics
Published In Volume 8, Issue 5, September-October 2026
Published On 2026-09-12
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i05.87533

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