International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160   •   Impact Factor: 9.24

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धार्मिक सहिष्णुता एवं नैतिक दर्शन

Author(s) Mr. MD Rizwan Ansari
Country India
Abstract सारांश (Abstract): यह शोध-पत्र भारतीय दर्शन एवं धार्मिक सहिष्णुता के सामाजिक, धार्मिक तथा नैतिक आदर्शों को विश्लेषणात्मक रूप में प्रस्तुत करता है। भारतीय इतिहास इस तथ्य का साक्षी है कि सम्राट अशोक जैसा शक्तिशाली सम्राट अपनी विशाल सेना के बल पर नहीं, अपितु धम्म की नीति अर्थात धार्मिक सहिष्णुता की नीति को अपनाकर 'महान' की उपाधि से विभूषित हुआ। इसी प्रकार मध्यकाल में सम्राट अकबर ने सुलह-ए-कुल एवं धार्मिक सहिष्णुता की नीति अपनाकर स्वयं को 'महान' सिद्ध किया, तथा आधुनिक भारत में महात्मा गांधी ने सर्वधर्म समभाव के सिद्धांत को अंगीकार कर एक साधारण व्यक्ति से 'महात्मा' का पद प्राप्त किया। प्रस्तुत अध्ययन इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि धार्मिक सहिष्णुता की नीति जब मात्र सिद्धांत तक सीमित न रहकर व्यवहार में भी उतरती है, तभी एक राजा सम्राट (अशोक, अकबर के रूप में) तथा एक साधारण आत्मा महात्मा (गांधी के रूप में) में रूपांतरित होती है। भारतीय दर्शन का यह आदर्श सदैव सार्वभौमिक सत्य रहा है।
Keywords मूल शब्द (Keywords): धार्मिक सहिष्णुता, नैतिक आदर्श, सर्वधर्म समभाव, सहनशीलता एवं अहिंसा, धम्म की नीति, सुलह-ए-कुल, सम्राट अशोक, सम्राट अकबर, महात्मा गांधी, सामाजिक-राजनीतिक एवं धार्मिक दृष्टिकोण।
Field Arts
Published In Volume 8, Issue 5, September-October 2026
Published On 2026-10-03
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i05.88576

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