International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160   •   Impact Factor: 9.24

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समकालीन पश्चिम एशिया संकट और भारत: सामरिक स्वायत्तता और बहु-संरेखण का विश्लेषण

Author(s) Yogesh Dubey, Prof. Rajani Kant Pandey
Country India
Abstract पश्चिम एशिया में फरवरी 2026 के अंत में प्रारंभ हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान संघर्ष ने क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और वैश्विक आर्थिक स्थिरता के समक्ष गंभीर चुनौतियाँ उत्पन्न की हैं। भारत के लिए यह संकट विशेष महत्व रखता है, क्योंकि पश्चिम एशिया भारत की ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, प्रवासी भारतीय समुदाय, समुद्री संपर्कता और रणनीतिक साझेदारियों से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है। यह शोध-पत्र समकालीन पश्चिम एशिया संकट के संदर्भ में भारत की सामरिक स्वायत्तता और बहु-संरेखण की नीति का विश्लेषण करता है। अध्ययन गुणात्मक नीति-विश्लेषण पर आधारित है तथा सरकारी वक्तव्यों, शोध संस्थानों और समाचार पत्रों में उपलब्ध सामग्री का उपयोग करता है। अध्ययन का तर्क है कि भारत की वर्तमान पश्चिम एशिया नीति पारंपरिक गुटनिरपेक्षता का विस्तार नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों पर आधारित बहु-संरेखण का व्यावहारिक रूप है। भारत एक ओर अमेरिका और इजरायल के साथ रक्षा, प्रौद्योगिकी तथा रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान, और खाड़ी देशों के साथ ऊर्जा, व्यापार और संपर्कता संबंधों को बनाए रखा है। संकट ने इस नीति की उपयोगिता को प्रदर्शित किया है, लेकिन साथ ही ऊर्जा आयात, समुद्री मार्गों और क्षेत्रीय अस्थिरता पर भारत की निर्भरता की सीमाओं को भी प्रगट किया है।
Keywords पश्चिम एशिया, सामरिक स्वायत्तता, बहु-संरेखण, ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा
Field Sociology > Politics
Published In Volume 8, Issue 5, September-October 2026
Published On 2026-10-10
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i05.89375

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