International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160   •   Impact Factor: 9.24

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ईसाई मिषनरीयों का आगमन एवं गतिविधि : ऐतिहासिक अध्ययन (ई.सन 1880 से ई.सन् 1980 तक म.प्र. के बैतूल जिले के संदर्भ में)

Author(s) Dr. Jaimini Khanwe
Country India
Abstract द इंवेेजिलिकल नेषनल मिषनरी सोसायटी ऑफ स्वीडन का आरंभ 01 मई 1856 को मुख्यतः इसाई धर्म के धार्मिक प्रचार-प्रसार के लिए किया गया।1 इस मिषन का संबंध भारत में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के मध्य कार्यरत मिषन फ्री चर्च ऑफ स्काटलैड मिषन से था। यह संस्था भारत में ईसाई धर्म के प्रचार के लिये कार्य करती थी। मिषन का कार्य क्षेत्र प्रायः आदिवासी, जनजाति बाहुल्य जिले व क्षेत्र थे, जिससे हिन्दुओं को ईसाई धर्म में धर्मान्तरण में मिषनरियों को सुविधा हो सके। मिषनरी के द्वारा ईसाई धर्म के प्रचार हेतु अन्य देषों से आये मिषनरीयों ने ईसाई धर्म के प्रचार व प्रसार हेतु जिस तरह से कार्य किया एवं धर्मान्तरण का अपना लक्ष्य प्राप्त किया, यह षोध का विषय है। सुदूर क्षेत्रों में निवास, भाषा की अज्ञानता, विपरीत जलवायु में कार्य करना और धर्मान्तरण हेतु आवष्यक पृष्ठभूमि का निर्माण मिषनरीयों का मुख्य कार्य रहा है। स्वीडिश मिशन या गोंड़ी मिशन का लक्ष्य था कि आदिवासी, जनजाति गोंड़ो के मध्य प्रचार कार्य हो । बैतूल में वर्ष 1880 ईसवी में पी. कार्लसन ने प्रवेश किया था और धर्मान्तरण एवं इसाई धर्म का प्रचार का कार्य किया। बैतूल जिले में इसाई धर्म का प्रार्दुभाव ब्रिटिष षासन के समय हुआ।
Keywords इवेंजलिकल लूथरन चर्च, ईसाई धर्म, मिषनरी, सु-समाचार प्रचारक, बपतिस्मा
Field Sociology > Archaeology / History
Published In Volume 8, Issue 5, September-October 2026
Published On 2026-10-21
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i05.90038

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