International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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मुंशी प्रेमचंद के कहानी साहित्य में चित्रित वृद्ध विमर्श

Author(s) Savitri Suryakant Mandhare
Country India
Abstract आज के दिनों में बुजुर्गों की समस्या बड़ी समस्या हो गयी हैं , लोग बुजुर्ग माता पिता को एक तो घर में अकेले छोड़ देते हैं या उन्हें अनाथ आश्रम में छोड़ देते हैं I कई खबरे हम आज की तारीख में देख रहे हैं I जो बुजुर्ग अपने परिवार के लिए जिंदगी भर कष्ठ उठाते हैं उन्हें घर से बेदखल किया जाता हैं I अंध मा बाप को रेलवे स्टेशन पर अकेले छोड़ दिया जाता हैं I समाज में भी अकेले बेसहारा वृद्ध की अवहेलना की जाती हैं I उनके घर, जायदाद हथियाए जाते हैं I नजदीकी रिश्र्तेदार शुरुआत में तो बहुत सहानुभूति दिखाते हैं लेकिन एक बार जायदाद अपने नामपर करवाने के बाद उन्हें घर से निकाला जाता है , पेट भर खाने के लिए भी उन्हें तरसना पड़ता हैं I यह समस्या प्रेमचंद जी ने अपने कहानी साहित्य के द्वारा उजागर की हुई हैं I आज जो गहन समस्या बन गयी है उसे प्रेमचंद जी ने कई साल पहले ही अपने साहित्य का विषय बनाया था I वह एक यथार्थवादी साहित्यकार होने के कारन उनकी कहानीया हमें अपने घर ,आस पड़ोस की कहानीया लगती हैं I उनकी कहानियों से हमें वृद्ध विमर्श की झांकी साफ साफ दिखती हैं I इसी वृद्ध विमर्शका अभ्यास करने हेतु यह शोध आलेख सादर किया जा रहा हैं I
Keywords विमर्श , वृद्ध , कृषक , संतानहिन, विधवा
Field Arts
Published In Volume 6, Issue 1, January-February 2024
Published On 2024-01-04
Cite This मुंशी प्रेमचंद के कहानी साहित्य में चित्रित वृद्ध विमर्श - Savitri Suryakant Mandhare - IJFMR Volume 6, Issue 1, January-February 2024. DOI 10.36948/ijfmr.2024.v06i01.11625
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2024.v06i01.11625
Short DOI https://doi.org/gtdsb9

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