International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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सदियों से वैश्विक बाजार मे विपणन और बिक्री की भारतीय शैली

Author(s) Dr. Dhirendra Ojha, Dr. Harvansh Lal Maravi, Dr. Ajay Kumar Patel, Mrs. Prachi Yadav
Country India
Abstract हम अपने दैनिक जीवन में अलग-अलग प्रकार की विपणन (क्रय-विक्रय) की क्रियाओ को करते है। प्राचीन काल में भी विपणन की क्रियाओ की प्रक्रिया को करना पड़ता था। लेकिन उस समय क्रय-विक्रय का माध्यम अलग प्रकार का था। जिसकों हम विनियम (आदान-प्रदान) के नाम से जानते थे। जिसे वस्तु विनिमय भी कहा जाता था। प्राचीन भारत में व्यापारिक मार्गों का अत्यधिक महत्व था। रेशम मार्ग एक ऐतिहासिक व्यापार मार्ग था। जिसका उपयोग दूसरी शताब्दी ई.पू. से 14वीं शताब्दी ईसवीं तक किया जाता था। यह एशिया से भूमध्य सागर तक फैला हुआ था, तथा चीन भारत, फ्रांस, अरब, ग्रीस और इटली से होकर जाता था।
विपणन को एक रचनात्मक उद्योग के रूप में देखा जाता है। जिसमें विपणन, वितरण और बिक्री को शामिल हैं। विपणन और बिक्री के लिए विभिन्न गतिविधियों शामिल होती है। जैसे उत्पाद की योजना कीमत, थोक विक्रेता, फुटकर विक्रेता, भण्डारण, परिवहन, आदि ये सभी विपणन को एक साथ आकर विपणन को एक रूप दे दी है।
Keywords विपणन, विनिमय, एशिया, प्राचीन
Field Mathematics > Economy / Commerce
Published In Volume 7, Issue 4, July-August 2025
Published On 2025-08-04
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i04.52984

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