International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

A Widely Indexed Open Access Peer Reviewed Multidisciplinary Bi-monthly Scholarly International Journal

Call for Paper Volume 6 Issue 1 January-February 2024 Submit your research before last 3 days of February to publish your research paper in the issue of January-February.

भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी

Paper Id PIPRDA-2344
Author(s) आशा सिसौदिया
Country India
Abstract भारतीय राजनीति में महिलाओं की भूमिका यदि हम वर्तमान परिदृश्य में देखें तो पता चलता है कि राजनीति में महिलाओं की स्थिति ऐसी नहीं है जैसे 20 साल पहले थी। दुनिया का इतिहास इस बात की गवाही देता है कि राजनीति ने लोगों का शोषण किया है, राजनीति उन पुरुषों का अखाड़ा है जो कठोर और क्रूर व्यवहार करते रहे हैं। पुरुषों की शारीरिक शक्ति और उसका अहंकार राजनीतिक स्तर पर सर्वत्र दिखाई देता है और यही कारण है कि नरम स्वभाव की महिलाओं की भागीदारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कम रही है। स्वतंत्रता के पूर्व राजनीति में महिलाओं की भागीदारी नाम मात्र की थी। स्वतंत्रता के बाद महिलाओं की राजनीति में भागीदारी में वृद्धि हुई है और इसका श्रेय हमारे भारतीय संविधान को जाता है, जिसमे संविधान की प्रस्तावना में लैंगिक समानता की बात कही है। संविधान में दिए गए मौलिक अधिकार और अंतरराष्ट्रीय समानता का अधिकार अनुच्छेद में स्पष्ट रूप से महिलाओं, पुरुषों की समानता की बात कही गई है; बल्कि इससे भी आगे महिलाओं के पक्ष में सकारात्मक सोच कायम करने के लिए सशक्त बनाया गया है। सरकार द्वारा ऐसी कई योजनाएं बनाई गई है जिनमें महिलाओं का कल्याण एवं विकास हो। 73 और 74 वें संविधान संशोधन के तहत महिलाओं को पंचायत में सीटों एवं नगर निकाय के स्थानीय निकायों में आरक्षण प्रदान किया गया है ताकि महिलाओं की राजनीति में शसक्त भूमिका हो और महिलाओं को भेदभाव का सामना न करना पड़े। वर्तमान में महिलाओं ने घर की सीमा से लेकर शिक्षा के क्षेत्र में, साहित्य के क्षेत्र में, व्यवसाय के क्षेत्र में, राजनीतिक क्षेत्र में, फिल्म जगत के क्षेत्र में, अंतरिक्ष के क्षेत्र में अपनी योग्यता को पुरुष के समान साबित किया है और अपने लिए स्वयं सम्मानजनक स्थान बनाया है। लेकिन आज भी सामाजिक सोच प्रणाली का बदलाव लाने के लिए जमीनी स्तर पर कुछ पहल करनी होगी जिससे ग्रामीण शिक्षित महिलाओं को आगे आने का मौका मिले। विडंबना यह है कि संसद और विधानसभा में एक तिहाई महिला भागीदारी बढ़ाने का विधेयक 1998 से लंबित है।
Published In Conference / Special Issue (Volume 5 | Issue 1) - डिजिटल युग में साहित्यिक चोरी एवं बौद्धिक सम्पदा अधिकार (बहुविषयक) (PIPRDA-2023) (January 2023)
Published On 2023-01-25
Cite This भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी - आशा सिसौदिया - IJFMR Conference / Special Issue (Volume 5 | Issue 1) - डिजिटल युग में साहित्यिक चोरी एवं बौद्धिक सम्पदा अधिकार (बहुविषयक) (PIPRDA-2023) (January 2023).

Share this