International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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जनजातीय परंपरा से आधुनिकता की ओर : दक्षिणी राजस्थान का विकासशील समाज

Author(s) प्रियंका फलेजा
Country India
Abstract भारत विविधताओं का देश है जहाँ अनेक जनजातियाँ अपनी विशिष्ट परंपराओं, सांस्कृतिक धरोहरों और जीवन-मूल्यों के साथ निवास करती हैं। राजस्थान का दक्षिणी भाग—जिसमें मुख्यतः उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ और सिरोही ज़िले सम्मिलित हैं। जनजातीय समाज की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। यहाँ भील, गरासिया, डामोर, मीणा आदि प्रमुख आदिवासी समुदाय निवास करते हैं। ये समुदाय परंपरागत रूप से प्रकृति-पूजक, कृषि एवं वनों पर आश्रित तथा सामूहिक जीवन-मूल्यों को अपनाने वाले रहे हैं।
स्वतंत्रता-प्राप्ति के पश्चात् विकास योजनाओं, शिक्षा के प्रसार, स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी हस्तक्षेपों ने इन समुदायों के जीवन में अनेकानेक परिवर्तन लाए। आदिवासी समाज की पारंपरिक जीवन-शैली और आधुनिकता की लहर के बीच उत्पन्न संतुलन ने एक नए सामाजिक ढाँचे का निर्माण किया है, जिसे हम “विकासशील समाज” कह सकते हैं।
आज दक्षिणी राजस्थान का आदिवासी समाज परंपरा और आधुनिकता के द्वंद्व से गुजर रहा है। एक ओर वे अपनी संस्कृति, भाषा, लोककला और परंपराओं का संरक्षण करना चाहते हैं, तो दूसरी ओर शिक्षा, नगरीकरण और आधुनिक रोजगार के अवसर उन्हें सामाजिक रूपांतरण की दिशा में अग्रसर कर रहे हैं।
Keywords दक्षिणी राजस्थान, आदिवासी समाज, भील, गरासिया, मीणा, डामोर, परंपरा और आधुनिकता, सांस्कृतिक धरोहर, प्रकृति पूजा, लोकगीत और नृत्य, लोककला और शिल्प, वनौषधीय ज्ञान, कृषि और पशुपालन, वनोपज, प्रवास/पलायन, शिक्षा और अशिक्षा, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक परिवर्तन, आर्थिक विकास, पर्यावरणीय संकट, सांस्कृतिक अस्मिता संकट, सतत विकास आदि ।
Field Sociology
Published In Volume 7, Issue 4, July-August 2025
Published On 2025-08-26
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i04.54481

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