International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

A Widely Indexed Open Access Peer Reviewed Multidisciplinary Bi-monthly Scholarly International Journal

Call for Paper Volume 7, Issue 6 (November-December 2025) Submit your research before last 3 days of December to publish your research paper in the issue of November-December.

सु-शासन के साधन के तौर पर ई-शासन: वर्तमान भारतीय परिदृश्य

Author(s) Mr. Ashutosh Dev Pandey, Dr. Rajani Kant Pandey
Country India
Abstract हाल के दशकों में ई-शासन सुशासन को साकार करने का प्रमुख साधन बनकर उभरा है। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकियों (ICT) के माध्यम से सरकारी सेवा-प्रदायन को अधिक पारदर्शी, त्वरित, कुशल एवं नागरिक-केंद्रित बनाने की क्षमता ने ई-शासन को प्रशासनिक सुधारों हेतु महत्वपूर्ण बना दिया है। भारतीय में ई-शासन का विकास 1970 के दशक से आरंभ होकर NIC, NICNET, 2000 के न्यूनतम एजेंडा, राष्ट्रीय ई-शासन योजना (NeGP) तथा 2015 के डिजिटल इंडिया मिशन जैसे महत्त्वपूर्ण चरणों से गुजरता हुआ आज व्यापक रूप ले चुका है। दूरसंचार अवसंरचना के तीव्र विस्तार, इंटरनेट कनेक्टिविटी में वृद्धि तथा जन सेवा केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण स्तर तक सैकड़ों सेवाओं की उपलब्धता एवं MyGov, CPGRAMS, DBT जैसे सरकारी प्रयासों ने ई-शासन की उपयोगिता को सिद्ध किया है। इसके परिणामस्वरूप सुशासन की उस अवधारणा की पुष्टि हुई है, जिसे पारदर्शिता, जवाबदेही, विधि-शासन, नागरिक सहभागिता और समावेशिता के रूप में परिभाषित किया गया है तथा जिसे विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक संगठनों ने विकास की अनिवार्य शर्त माना है। प्रस्तुत शोध-पत्र ई-शासन के इन ऐतिहासिक, संस्थागत और तकनीकी आयामों के अध्ययन के माध्यम से भारत में सुशासन को बढ़ावा देने में इसके प्रभावों का विश्लेषण करता है।
Keywords सु-शासन, ई-शासन, पारदर्शिता, समावेशिता
Field Sociology > Administration / Law / Management
Published In Volume 7, Issue 6, November-December 2025
Published On 2025-11-29
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i06.62104
Short DOI https://doi.org/hbdsnb

Share this