International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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श्री परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज की योग साधना का स्वरूप

Author(s) Dr. Ashok Kumar Bhaskar, Dr. Shyam Sunder Pal
Country India
Abstract स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज ने परमहंस महाराज जी की सेवा करके, गीता के उसी तत्व को जाना । जिसे योगेश्वर श्री कृष्ण ने अर्जुन को बतलाया था । इसके लिए साधक को किसी महापुरुष की शरण में रहकर साधना करके अपनी इंद्रियों को जीत करके, उसे स्वरूप तक की दूरी को तय करना पड़ता है ।जिसके बाद ही वह साधक समझ पाता है कि गीता क्या कहती है ? आखिर गीता की उपासना क्या है ? साधना किसे कहते हैं? स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज ने अनेक ग्रंथों की रचना की । जो साधना के सही स्वरूप को उद्घाटित करते हैं । जिसमें उनका मुख्य बिंदु यह है कि साधक ॐ , राम अथवा शिव में से कोई एक नाम चुनकर उसका जप करे । जप की चार श्रेणियां है - बैखरी , मध्यमा, पश्यन्ति और परा। यदि साधक सद्गुरु को ५ से १० मिनट से अधिक समय तक हृदय में धारण करने लगा तो सद्गुरु उसको हृदय में बैठकर मार्गदर्शन करने लगेंगे और साधक को धीरे- धीरे स्वरुप तक की दुरी तय करा देंगे ।
Keywords योगदर्शन , यथार्थ गीता , कर्म , योग , ॐ , जप, सद्गुरु , ध्यान
Field Sociology > Philosophy / Psychology / Religion
Published In Volume 8, Issue 1, January-February 2026
Published On 2026-01-07
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i01.62885
Short DOI https://doi.org/hbh55p

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