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E-ISSN: 2582-2160   •   Impact Factor: 9.24

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बिहार राज्य में बालिका शिक्षा की स्थिति-परिस्थिति: बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने वाली सरकारी योजनाओं के संदर्भ में बालिकाओं के हाशिएकरण, बहिष्करण और समावेशन का अध्ययन

Author(s) जयनाथ चौधरी Jaynath Choudhary
Country India
Abstract बिहार, जो कभी नालंदा और विक्रमशिला जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों के माध्यम से ज्ञान की वैश्विक राजधानी के रूप में प्रतिष्ठित था, आधुनिक भारत के शैक्षिक परिदृश्य में एक विरोधाभासी स्थिति प्रस्तुत करता है। ऐतिहासिक रूप से, बिहार का सामाजिक ढाँचा गहरी जड़ें जमा चुकी पितृसत्तात्मक व्यवस्था, जातिगत स्तरीकरण और सामंती मानसिकता द्वारा परिभाषित किया गया है। इन संरचनाओं ने पारंपरिक रूप से महिलाओं को घरेलू दायरे तक सीमित रखा और शिक्षा को लड़कों के विशेषाधिकार के रूप में देखा। हालांकि, 21वीं सदी के पहले दो दशकों में, बिहार ने एक आदर्श बदलाव (Paradigm Shift) देखा है। राज्य सरकार ने यह पहचाना कि केवल आर्थिक विकास पर्याप्त नहीं है; सामाजिक संकेतकों, विशेष रूप से बालिका शिक्षा/महिला साक्षरता और लिंगानुपात में सुधार के बिना, राज्य की प्रगति अधूरी रहेगी। जिसके लिए राज्य सरकार ने कई प्रोत्साहन और कल्याणकारी योजनाओं की पहल भी की, इसी संदर्भ में यह शोध अध्ययन बिहार में बालिका शिक्षा की वर्तमान स्थिति का गहन विश्लेषण करने का प्रयास करता है। यह अध्ययन केवल नामांकन और साक्षरता के आँकड़ों का संकलन नहीं है, बल्कि यह उन जटिल सामाजिक-आर्थिक प्रक्रियाओं की जाँच करता है, जो बालिकाओं को स्कूल से दूर धकेलती हैं (बहिष्करण) या उन्हें स्कूल तक खींचती हैं (समावेशन)। इसकी पूर्ति के लिए यह अध्ययन उपलब्ध द्वितीयक आँकड़ों (Secondary Data) का व्यापक विश्लेषण करने का प्रयास करता है। और अंत में, इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि बिहार में बालिका शिक्षा की स्थिति में पिछले दो दशकों में निश्चित रूप से सुधार हुआ है। राज्य सरकार की दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति और नवीन योजनाओं ने लड़कियों को हाशिए से उठाकर स्कूल के प्रांगण तक जरूर पहुँचाया है। तथापि, समावेशी और गुणवत्ता युक्त शिक्षा का लक्ष्य अभी भी कोसो दूर है।
Keywords बालिका शिक्षा, प्रोत्साहन योजना, सीखने के परणाम, हाशिएकरण, बहिष्करण, समावेशन
Field Sociology > Education
Published In Volume 7, Issue 6, November-December 2025
Published On 2025-12-25
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i06.64451

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