International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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सहकारी संघवाद से प्रतिस्पर्धात्मक संघवाद: भारतीय केंद्र-राज्य संबंधों में क्षेत्रीय पहचान की भूमिका

Author(s) Mr. Nikhil Kumar, Ms. Priyanka Kumari
Country India
Abstract भारतीय संघवाद के विकास क्रम में एक बड़ा बदलाव आया है। योजना आयोग के दौर के सहकारी ढांचे से हटकर वर्तमान समय, विशेष रूप से वर्ष 2014 के बाद से प्रतिस्पर्धात्मक संघवाद की ओर झुकाव बढ़ा है। यह शोध पत्र इस बदलाव में क्षेत्रीय अस्मिता की भूमिका का विश्लेषण करता है। पारंपरिक रूप से क्षेत्रवाद को राष्ट्रीय एकता के लिए चुनौती माना जाता रहा है, किन्तु यह शोध पत्र तर्क देता है कि क्षेत्रीय पहचान अब एक आर्थिक और राजनीतिक संपत्ति बन गई है। राज्य अब निवेश और केंद्रीय धन को आकर्षित करने के लिए अपनी भाषाई और सांस्कृतिक पहचान का उपयोग कर रहे हैं। यह शोध पत्र केंद्र-राज्य संबंधों का विश्लेषण करते हुए यह दर्शाता है कि कैसे उप-राष्ट्रीयता राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देती है। इसके साथ ही, यह उन चुनौतियों पर भी प्रकाश डालता है जो वित्तीय आवंटन और उत्तर-दक्षिण भारत के बीच के अंतर को लेकर उत्पन्न हो रही हैं। निष्कर्षत यह पत्र सुझाव देता है कि प्रतिस्पर्धात्मक संघवाद की सफलता के लिए क्षेत्रीय स्वायत्तता का सम्मान और संतुलित विकास अनिवार्य है।
Keywords प्रतिस्पर्धात्मक संघवाद, क्षेत्रीय अस्मिता, केंद्र-राज्य संबंध, नीति आयोग, उप-राष्ट्रीयता, वित्तीय संघवाद।
Field Sociology > Politics
Published In Volume 7, Issue 6, November-December 2025
Published On 2025-12-31
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i06.65158

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