International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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आधुनिक राष्ट्र-राज्य में युवाओं में मनोवैज्ञानिक तनाव और नशीली दवाओं का सेवन: एक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

Author(s) Dr. Bishwjeet Bhartiya
Country India
Abstract यह शोध-पत्र आधुनिक राष्ट्र-राज्य की संरचना के भीतर युवाओं में मनोवैज्ञानिक तनाव और नशीले पदार्थों के सेवन के बीच जटिल संबंधों का विश्लेषण करता है, जिसमें भारतीय समाज को एक ऐतिहासिक अध्ययन के रूप में प्रस्तुत किया गया है। औपनिवेशिक काल से लेकर स्वतंत्रता-पश्चात भारत तक, समाजिक-राजनीतिक परिवर्तन, आर्थिक पुनर्संरचना और संस्कृतिक बदलावों ने निरंतर युवाओं के तनाव, चिंता और पहचान-संकट को आकार दिया है। यह अध्ययन तर्क देता है कि आधुनिकीकरण, तीव्र नगरीकरण, प्रतिस्पर्धात्मक शिक्षा प्रणाली, बेरोज़गारी और बदलती पारिवारिक संरचनाओं ने युवाओं पर मनोवैज्ञानिक दबाव को बढ़ा दिया है।ऐतिहासिक रूप से भारत में नशीले पदार्थों का उपयोग धार्मिक और औषधीय संदर्भों तक सीमित था; किंतु औपनिवेशिक नियमन और बाद में पूँजीवादी बाज़ार के विस्तार के कारण शराब, तंबाकू और मादक द्रव्यों का व्यवसायीकरण हुआ, जिससे वे समाजिक रूप से विघटनकारी बन गए। समकालीन राष्ट्र-राज्य में वैश्वीकरण, डिजिटल मीडिया और उपभोक्ता संस्कृति ने अप्राप्य आकांक्षाओं को बढ़ावा देकर तनाव को और तीव्र कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप कुछ युवा नशीले पदार्थों को तनाव से निपटने के साधन के रूप में अपनाते हैं। ऐतिहासिक अभिलेखों, नीतिगत दस्तावेज़ों और सार्वजनिक स्वास्थ्य रिपोर्टों जैसे द्वितीयक स्रोतों के आधार पर यह अध्ययन भारतीय युवाओं में नशे के स्वरूपों में क्षेत्रीय और समाजिक-आर्थिक विविधताओं को उजागर करता है। साथ ही, यह भारतीय राज्य की भूमिका का समालोचनात्मक मूल्यांकन करता है—विशेषकर कानूनी ढाँचे, शैक्षणिक सुधार, मानसिक स्वास्थ्य पहलों और नशामुक्ति कार्यक्रमों के संदर्भ में। ऐतिहासिक दृष्टिकोण अपनाते हुए यह शोध स्पष्ट करता है कि युवाओं में नशीले पदार्थों का सेवन केवल व्यक्तिगत विकृति नहीं, बल्कि दीर्घकालिक समाजिक-राजनीतिक प्रक्रियाओं का संरचनात्मक परिणाम है। अंततः यह अध्ययन युवाओं के तनाव और नशे की समस्या से निपटने के लिए ऐतिहासिक रूप से सूचित, संस्कृतिक रूप से संवेदनशील और मनोवैज्ञानिक रूप से सुदृढ़ नीतिगत हस्तक्षेपों की आवश्यकता पर बल देता है।
Keywords मनोवैज्ञानिक तनाव; नशीले पदार्थों का सेवन; युवा; राष्ट्र-राज्य; भारतीय समाज; ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
Field Sociology > Philosophy / Psychology / Religion
Published In Volume 8, Issue 1, January-February 2026
Published On 2026-01-11
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i01.66187

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