International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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बेड़ो प्रखण्ड के जनजातीय क्षेत्रों में सतत विकास: एक भौगोलिक विश्लेषण

Author(s) Mr. Akash Oraon
Country India
Abstract जनजातियों ने हजारों वर्षों से जंगलों में पहाड़ों खुले मैदानों तथा सभ्यता के केंद्रों में बसे लोगों से अधिक सम्पर्क स्थापित किए बिना ही अपने अस्तित्व को बनाए रखा है। विदेशियों के लगातार आक्रमण तथा अधिक शक्तिशाली पड़ोसी समुदायों के निरंतर दबाव के कारण उन्हें जंगलो पहाड़ों एवं अन्य दुर्गम क्षेत्रों की ओर जाने के लिए बाध्य होना पड़ा। जनजाति अपनी आर्थिक सामाजिक एवं बौद्धिक आवश्कता के लिए प्राकृतिक संसाधनो का उपयोग करता है। आजीविका के लिए कृषि आखेट खनन एवं भोजन संग्रहण और प्राकृतिक पर निर्भर रहता है। जनजातीय के कल्याण के लिए बहुत से योजनाएं लाये गये है पर जनजाति की स्थिति पिछड़ा हुआ ही है सतत विकास केवल आर्थिक वृद्धि का पर्याय नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय, सांस्कृतिक विविधता, और पर्यावरणीय संतुलन का सम्मिलित रूप है। बेड़ों प्रखण्ड के जनजातीय क्षेत्रों में यह अवधारणा विशेष महत्व रखती है, क्योंकि यहाँ के समुदाय प्रकृति के साथ गहराई से जुड़े हुए हैं। आधुनिक विकास की प्रक्रिया ने जहाँ नई संभावनाएँ खोली हैं, वहीं इसने पारंपरिक ज्ञान, संसाधनों और सांस्कृतिक पहचान को भी खतरे में डाला है। यह शोध-पत्र जनजातीय क्षेत्रों में सतत विकास की चुनौतियों, अवसरों और संभावनाओं का अध्ययन करता है तथा यह दर्शाता है कि समावेशी एवं सांस्कृतिक दृष्टिकोण अपनाकर ही वास्तविक विकास संभव है।
Keywords मुख्य शब्द: सतत विकास, जनजातीय समुदाय, सांस्कृतिक दृष्टिकोण, संसाधन प्रबंधन, समावेशी नीति
Published In Volume 8, Issue 1, January-February 2026
Published On 2026-01-19
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i01.66787

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