International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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हिन्दी में आका लोक साहित्य का अध्ययन: संभावना एवं चुनौतियाँ

Author(s) सुश्री संतिमो निमासो
Country India
Abstract अरुणाचल प्रदेश एक जनजातियाँ प्रदेश है। यहाँ छब्बीस जनजातियाँ और सौ से भी अधिक उप-जनजातियों का निवास है । जैसे- आका, आदी, अपातानी, गालों, खामती, तागिन, तांगसा, नोकते, न्यीशी, मिशमी, मोन्पा, शेरदुकपन आदि। प्रत्येक जनजातियों के अपनी भिन्न परंपरा, संस्कृति, लोक विश्वास, प्रथा, वेशभूषा तथा बोलियाँ हैं। इन्ही माध्यमों से उनकी पहचान झलकती है। सभी जनजातियाँ एक दूसरी से भिन्न होने के बावजूद उन्मे एक समानता देखी जाती है वह है उनके कृषि जीवन। अतः भौगोलिक रूप से पहाड़ी प्रदेश होने के कारण कुछ समुदायों को छोड़कर अधिकतर जनजाति झूम खेती करते हैं। आका जनजाति अरुणाचल प्रदेश के छब्बीस जनजातियों में एक है। आका समाज में लोक साहित्य प्रचुर मात्र में पाई जाती है। बहुरंगी संस्कृति तथा समृद्ध परंपराओं एवं प्राकृतिक सुषमाओं से सम्पन्न आका समाज की लोक साहित्य भी उन्नत और व्यापक है। लिपि के अभाव में आका लोक साहित्य मौखिक परंपरा में ही रक्षित है। आका लोक साहित्य के अध्ययन-अध्यापन की कोई व्यवस्था नहीं है इसलिए आका लोक साहित्य के प्रति लोगों की रुचि घट रही है। अरुणाचल प्रदेश की राजभाषा अंग्रेजी है तथा हिन्दी संपर्कभाषा है। आका समाज की युवा पीढ़ी में भी अंग्रेजी और हिन्दी सीखने की होड़ बढ़ी हैं। ऐसे में आका लोक साहित्य के सामने इसके लुप्त होने का खतरा बढ़ गया है। इसलिए आका लोक साहित्य की विभिन्न विधाओं को संग्रहीत करने के साथ-साथ देवनागरी लिपि में प्रलेखीकरण करना अति आवश्यक है। ऐसे करने पर आका लोक साहित्य के माध्यम से आका जनजाति के समाज एवं संस्कृति को जानने का विशेष अवसर प्राप्त होगा। साथ ही अन्य जनजातियों के लोकसाहित्य की भाँति आका लोकसाहित्य का भी अन्य लोक साहित्य के साथ तुलनात्मक अध्ययन का मार्ग प्रशस्त होगा।
Keywords अरुणाचल प्रदेश, आका जनजाति, आका लोक साहित्य,
Field Sociology > Linguistic / Literature
Published In Volume 8, Issue 1, January-February 2026
Published On 2026-02-10

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