International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160   •   Impact Factor: 9.24

A Widely Indexed Open Access Peer Reviewed Multidisciplinary Bi-monthly Scholarly International Journal

Call for Paper Volume 8, Issue 5 (September-October 2026) Submit your research before last 3 days of October to publish your research paper in the issue of September-October.

भारतीय दर्शन में नैतिकता की भूमिका

Author(s) Dr. Kumari Sudha Devi
Country India
Abstract भारतीय दर्शन में नैतिकता को 'धर्म' के व्यापक रूप में देखा गया है, जो ब्रह्मांडीय व्यवस्था, कर्म सिद्धांत, पुरुषार्थ और आत्म-साक्षात्कार से जुड़ी हुई है। यह पाश्चात्य नैतिकता से भिन्न है, क्योंकि यहाँ सत्य की खोज और निष्काम कर्म के माध्यम से सांसारिक उत्कर्ष के साथ मोक्ष को एकीकृत किया गया है। आस्तिक दर्शनों जैसे सांख्य, योग, मीमांसा, वेदांत में विवेक, यम-नियम, अद्वैत और अपूर्व जैसे आधार हैं, जबकि नास्तिक दर्शनों (जैन, बौद्ध) में अहिंसा-करुणा प्रधान है; चार्वाक अपवादस्वरूप भौतिक सुख को लक्ष्य मानता है। भगवद्गीता निष्काम कर्म का सर्वोत्तम उदाहरण प्रस्तुत करती है, और वर्णाश्रम तथा वसुधैव कुटुम्बकम् जैसे सिद्धांत सामाजिक-पर्यावरणीय नैतिकता को मजबूत करते हैं। यह नैतिकता आंतरिक दिव्यता को जागृत करने वाली साधना है।
Field Arts
Published In Volume 8, Issue 2, March-April 2026
Published On 2026-04-05
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i02.71723

Share this