International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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देशी ज्ञान के प्रचार-प्रसार के रूप में घाघ और भड्डरी की कृषि संबंधी लोकोक्तियों का अध्ययन

Author(s) Dr. GOPAL KUMAR
Country India
Abstract लोकोक्तियाँ किसी समाज की परंपराओं और सोच को दर्शाती है। वे अपने पूरे समुदाय का एक ज़रूरी हिस्सा हैं और कहानियों के रूप में उसके बारे में जानकारी देती हैं। घाघ की लोकोक्तियों में कन्नौज, चम्पारण और मुज़फ्फरपुर जिले की उत्तरीय सरहद पर बैरगनिया और कुड़वा चैनपुर की शब्दावली बहुतायत में है। घाघ की लोकोक्तियों का प्रचार-प्रसार अवध के कन्नौज के आस-पास बहुत है। अन्य जिले के किसान उसे अपनी ही बोली में ढाले हुए हैं। इससे घाघ की लोकोक्तियों की भाषा से उनके जन्म स्थान का पता नहीं लग पाता। भारत मुख्य रूप से कृषि प्रधान देश है जिसमें ज़्यादातर छोटे किसान हैं जो खास पढ़े-लिखे नहीं हैं। विश्व की लगभग 30% आबादी कृषि कार्य से जुड़ी है। भारत मुख्य रूप से कृषि प्रधान देश है। 58% भारतीय जीविकोपार्जन हेतु कृषि कार्य पर निर्भर है। इसके लिए देशी ज्ञान पद्‌धति के उपाख्यान की ज़रूरत है जो आम लोगों तक ज्ञान पहुँचाने में मदद करने के लिए और भी ज़रूरी हो जाता है ताकि औपचारिक शिक्षा की कमी को पूरा किया जा सके और किसानों को आसानी से याद रखने में मदद मिल सके। इस तरह, यह भारतीय ज्ञान पद्‌धति का एक हिस्सा है, जो कृषि के क्षेत्र में पारंपरिक ज्ञान के बारे में जानकारी देता है जो सदियों से चला आ रहा है। यह शोध-पत्र इन कहावतों पर प्रकाश डालने का प्रयास करता है और कृषि के क्षेत्र में ज्ञान फैलाने के लिए एक किस्से-कहानियों के नज़रिए से उन्हें देखने की कोशिश करता है।
Keywords लोकोक्तियाँ, घाघ और भड्डरी, भारतीय ज्ञान पद्‌धति, कृषि, देशी ज्ञान
Field Arts
Published In Volume 8, Issue 2, March-April 2026
Published On 2026-03-06
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i02.74107

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