International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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समानता का कानून या सहमतत का समाज? आंबेडकर के दृतिकोण से UCC का पुनपााठ

Author(s) Manika Nirmesh, Prof. Seema Pawar
Country India
Abstract यह शोध-पत्र “समानिा का कानून या सहमति का समाज? आंबेडकर के दृतिकोण सेUCC का पुनपाठ” शीर्क केअंिगाि भारि मेंसमान नागररक संतहिा (UCC) के प्रश्न का पुनतिाचार करिा है। अध्ययन का उद्देश्य तितधक एकरूपिा
(legal uniformity) और सामातजक सहमति (social consent) के मध्य अंितनातहि िनाि को समझना है, तिशेर् रूप सेडॉ. B. R. Ambedkar के संिैधातनक दृतिकोण के संदभामें। यह शोध ऐतिहातसक, संिैधातनक िर्था तिश्लेर्णात्मक
पद्धति के माध्यम सेयह पड़िाल करिा हैतक भारि मेंआपरातधक और सािाजतनक कानूनोंमेंतिद्यमान एकरूपिा केबािजूद तििाह, िलाक, उत्तरातधकार िर्था पाररिाररक संबंधोंसेजुड़ेव्यक्तिगि कानून धातमाक एिं सामुदातयक आधार
पर तिभातजि क्ोंबनेहुए हैं, और यह संरचना नागररक समानिा िर्था अतधकारोंके अनुभि को तकस प्रकार प्रभातिि
करिी है। अध्ययन मेंसंतिधान सभा की बहसों, आंबेडकर के तितधक हस्तक्षेपोंिर्था समकालीन तितध आयोगीय तिमशों
के आलोक मेंयह तिश्लेर्ण तकया गया हैतक तितधक सुधार की प्रतिया के िल औपचाररक कानून-तनमााण का प्रश्न नहींहै, बक्ति यह सामातजक स्वीकृ ति, पहचान, और ऐतिहातसक अनुभिोंसेभी गहराई सेजुड़ी हुई है। शोध तिशेर् रूप सेयह जांचिा हैतक आंबेडकर के तिचारोंको पारंपररक रूप सेके िल “Uniform Civil Code” की अिधारणा िक सीतमि
करके देखना पयााप्त नहींहै, बक्ति उनके दृतिकोण मेंतनतहि ितमक सुधार, तितधक पुनसंरचना और सामातजक
सहमति के ित्ोंको पुनपााठ की आिश्यकिा है। इसी पररप्रेक्ष्य मेंयह अध्ययन व्यक्तिगि कानूनोंके भीिर तिद्यमान
लैंतगक असमानिाओं, अंिधाातमाक तितिधिाओंिर्था संघीय ढांचेसेउत्पन्न जतिलिाओंको तिश्लेर्ण का आधार बनािा
है। अिः यह शोध UCC की बहस को एक क्तथर्थर तितधक समाधान के रूप मेंनहीं, बक्ति एक बहु-आयामी सामातजक-िैधातनक प्रतिया के रूप मेंसमझनेका प्रयास करिा है, तजसमेंसमानिा, न्याय और तितिधिा के मध्य संबंधोंका
पुनमूाल्ांकन आिश्यक हो जािा है।
Keywords UCC (Uniform Civil Code) समान नागररक संतहिा ,CCC (Common Civil Code)साझा सामान्य नागररक संतहिा, लैंतगक न्याय, संिैधातनक नैतिकिा, तितधक बहुलिाद
Published In Volume 8, Issue 3, May-June 2026
Published On 2026-05-09
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i03.77391

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