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E-ISSN: 2582-2160   •   Impact Factor: 9.24

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ग्रामीण परिषदीय शिक्षिकाओं में 'भावनात्मक थकावट' और 'बर्नआउट' (मानसिक थकान): पारिवारिक असहयोग और कार्य-पारिवारिक संघर्ष का विश्लेषणात्मक अध्ययन

Author(s) Ms. Khushbu Singh, Dr. Ekta
Country India
Abstract प्रस्तुत शोध पत्र उत्तर प्रदेश के ग्रामीण परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत् महिला शिक्षिकाओं के मध्य उत्पन्न होने वाली 'भावनात्मक थकावट' (संवेगात्मक रिक्तीकरण) और 'बर्नआउट' (पूर्ण मानसिक व शारीरिक थकान) की गंभीर समस्या का गहन समाजशास्त्रीय विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन का मुख्य शोध प्रश्न यह अन्वेषण करना है कि क्या पति और ससुराल पक्ष का 'पारिवारिक असहयोग', कार्य-पारिवारिक संघर्ष को बढ़ाकर शिक्षिकाओं की व्यावसायिक प्रतिबद्धता को नष्ट कर रहा है? अनुसंधान प्रविधि के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के आगरा जनपद (विशेषकर अछनेरा विकास खण्ड) की 200 ग्रामीण शिक्षिकाओं का स्तरीकृत यादृच्छिक निदर्शन के माध्यम से चयन कर परिमाणात्मक एवं गुणात्मक अध्ययन किया गया। आँकड़ों के संकलन हेतु 'मासलाच बर्नआउट इन्वेंटरी' (एम.बी.आई.) और एक संरचित प्रश्नावली का उपयोग किया गया। मुख्य परिणामों से यह सांख्यिकीय रूप से सिद्ध हुआ कि जिन शिक्षिकाओं को घरेलू कार्यों (तथाकथित दूसरी पाली) में जीवनसाथी का सहयोग प्राप्त नहीं होता है, उनमें भूमिका संघर्ष का स्तर चरम पर होता है। सर्वेक्षण में 23.75 प्रतिशत शिक्षिकाओं में उच्च 'भावनात्मक थकावट' और 20 प्रतिशत में उच्च 'व्यक्तित्व-ह्रास' दर्ज किया गया। यह असहयोग सीधे तौर पर भावनात्मक थकावट को जन्म देता है, जो एक मध्यस्थ चर के रूप में कार्य करते हुए शिक्षिका की नौकरी के प्रति संतुष्टि और प्रतिबद्धता को लगभग समाप्त कर देता है। निष्कर्षतः, यह अध्ययन स्थापित करता है कि जब तक पितृसत्तात्मक पारिवारिक संरचनाओं और घरेलू श्रम-विभाजन में लैंगिक समानता स्थापित नहीं होती, तब तक ग्रामीण शिक्षिकाओं का यह अदृश्य बर्नआउट संपूर्ण प्राथमिक शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता रहेगा।
Keywords भावनात्मक थकावट, बर्नआउट, कार्य-पारिवारिक संघर्ष, पारिवारिक असहयोग, महिला शिक्षिका, दोहरी भूमिका, पितृसत्ता
Field Sociology
Published In Volume 8, Issue 3, May-June 2026
Published On 2026-05-13
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i03.77739

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