International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160   •   Impact Factor: 9.24

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भारत में मानव अधिकार संरक्षण की संवैधानिक व्यवस्था

Author(s) कौशल कुमार सैन
Country India
Abstract भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है, जहाँ मानव अधिकारों की रक्षा को संविधान का मूल आधार माना गया है। भारतीय संविधान नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता, न्याय और गरिमा प्रदान करने के उद्देश्य से विभिन्न मौलिक अधिकारों एवं संवैधानिक प्रावधानों की व्यवस्था करता है। इस शोध का उद्देश्य भारत में मानव अधिकार संरक्षण की संवैधानिक व्यवस्था, उसके प्रभाव तथा समकालीन चुनौतियों का अध्ययन करना है। अध्ययन में पाया गया कि भारतीय संविधान के भाग-III में वर्णित मौलिक अधिकार मानव अधिकारों की रक्षा का प्रमुख आधार हैं। समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण के विरुद्ध अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार, सांस्कृतिक एवं शैक्षिक अधिकार तथा संवैधानिक उपचारों का अधिकार नागरिकों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करते हैं। इसके अतिरिक्त राज्य के नीति निदेशक तत्व सामाजिक और आर्थिक न्याय की स्थापना में सहायक हैं। शोध में यह स्पष्ट किया गया है कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों ने मानव अधिकारों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। न्यायपालिका ने विभिन्न ऐतिहासिक निर्णयों के माध्यम से जीवन के अधिकार की व्यापक व्याख्या करते हुए शिक्षा, स्वच्छ पर्यावरण, निजता और सम्मानजनक जीवन को भी मानव अधिकारों का हिस्सा माना है। जनहित याचिका (PIL) की व्यवस्था ने आम नागरिकों को न्याय तक पहुँच आसान बनाई है। अध्ययन में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), राज्य मानवाधिकार आयोगों तथा अन्य संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका का भी विश्लेषण किया गया है। ये संस्थाएँ मानव अधिकार उल्लंघन के मामलों की जाँच, जागरूकता और सुझाव देने का कार्य करती हैं। हालाँकि शोध में यह भी पाया गया कि गरीबी, अशिक्षा, जातीय भेदभाव, लैंगिक असमानता, पुलिस अत्याचार तथा सामाजिक असमानताओं के कारण मानव अधिकारों का पूर्ण संरक्षण अभी भी चुनौती बना हुआ है। ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में जागरूकता की कमी तथा न्यायिक प्रक्रिया की जटिलता भी मानव अधिकार संरक्षण में बाधा उत्पन्न करती है।
Published In Volume 3, Issue 6, November-December 2021
Published On 2021-12-10

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