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E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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बिहार में पिछड़ी जातियों का सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक सशक्तिकरण

Author(s) Dr. Pramod Kumar Singh
Country India
Abstract इस शोध-पत्र में बिहार की पिछड़ी जातियों के सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक सशक्तिकरण की प्रक्रिया, उसकी चुनौतियों तथा उपलब्धियों का समग्र विश्लेषण किया गया है। ऐतिहासिक रूप से सामाजिक भेदभाव, शैक्षिक पिछड़ेपन, भूमि-विहीनता और संसाधनों पर सीमित अधिकार के कारण ये समुदाय विकास की मुख्यधारा से दूर रहे हैं। 1990 के दशक के बाद मंडल आयोग की सिफारिशों, आरक्षण नीतियों, पंचायतों में महिलाओं एवं पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षित सीटों, कल्याणकारी योजनाओं तथा क्षेत्रीय दलों के उदय ने इन वर्गों को राजनीतिक रूप से अधिक संगठित एवं मुखर बनाया।
शोध में गुणात्मक और मात्रात्मक दोनों प्रकार के स्रोतों—जनगणना आँकड़े, सरकारी रिपोर्टें, नीतिगत दस्तावेज, चुनावी आँकड़े और क्षेत्रीय साक्षात्कार—का उपयोग करके यह समझने का प्रयास किया गया है कि शिक्षा, रोजगार, भूमि-अधिकार, उद्यमिता, स्थानीय शासन में भागीदारी, तथा प्रतिनिधित्व की बढ़ती संभावनाओं ने पिछड़ी जातियों के जीवन-स्तर और आत्म-सम्मान को किस हद तक बदला है। साथ ही, जाति-आधारित असमानताओं की निरंतरता, संसाधनों व अवसरों के असमान वितरण, पितृसत्ता, तथा भ्रष्टाचार जैसी संरचनात्मक बाधाओं को भी रेखांकित किया गया है, जो सशक्तिकरण की प्रक्रिया को सीमित करती हैं।
अध्ययन का निष्कर्ष है कि बिहार में पिछड़ी जातियों का सशक्तिकरण एक बहुस्तरीय और अपूर्ण लेकिन महत्वपूर्ण प्रक्रिया है; इसमें राजनीतिक प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत अधिक सफल दिखता है, जबकि सामाजिक समानता और आर्थिक आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में अभी भी व्यापक सुधार की आवश्यकता बनी हुई है। यह शोध नीतिनिर्माताओं के लिए यह संकेत देता है कि केवल आरक्षण या कल्याणकारी योजनाएँ पर्याप्त नहीं हैं; बल्कि समावेशी शिक्षा, कौशल विकास, स्थानीय अर्थव्यवस्था में भागीदारी और जाति-आधारित भेदभाव के खिलाफ ठोस सामाजिक-सांस्कृतिक हस्तक्षेप आवश्यक हैं।
Keywords सशक्तिकरण, पिछड़ी जातियाँ, राजनीतिक प्रतिनिधित्व, सामाजिक असमानता, आरक्षण नीतियाँ
Field Sociology > Politics
Published In Volume 8, Issue 3, May-June 2026
Published On 2026-05-17

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