International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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मानव जीवन में चक्र प्रणाली का मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव : एक दार्शनिक और वैज्ञानिक अध्ययन

Author(s) Ms. Anju Kumari, Mr. Atul Kumar, Ms. Deepika .
Country India
Abstract चक्र शब्द संस्कृत से लिया गया है जिसका उपयोग भारतीय दर्शन और योग में ऊर्जा केंद्रों के रूप में किया जाता है। ये ऊर्जा केंद्र, जिन्हें प्राण या आत्मिक ऊर्जा का केंद्र कहा जाता है यह शरीर में विशिष्ट स्थानों पर स्थित होते हैं यह माना जाता है कि ये नाड़ियों के संगम स्थान हैं। जो ऊर्जा (प्राण) के प्रवाह को नियंत्रित करते हैं। यह केंद्र शरीर में ऊर्जा को प्रसारित करने और उसे संतुलित करने में मदद करते हैं। चक्रों की अवधारणा प्राचीन ग्रंथों उपनिषद और हठयोग के ग्रंथों में उपलव्ध है। चक्रों का शारीरिक, भावनात्मक,आध्यात्मिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है। योग के अभ्यास जैसे - आसन, प्राणायाम और ध्यान के माध्यम से चक्रों पर ध्यान केंद्रित करके ऊर्जा के प्रवाह में सुधार किया जा सकता है। मुख्यत: सात चक्र माने जाते हैं वह इस प्रकार से है- मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनाहत, विशुद्धि, आज्ञा, और सहस्रार। जो रीढ़ की हड्डी के साथ-साथ स्थित होते हैं। प्रत्येक चक्र का अपना विशिष्ट स्थान, रंग, मंत्र और कार्य होता है प्रत्येक चक्र शरीर में प्रमुख ग्रंथियों को प्रभावित करते है जिससे हार्मोनल स्राव, और मानसिक संतुलन प्रभावित होता है। जैसे उदहारण के लिए - पीनियल ग्रंथि में असंतुलन से नींद और अवसाद जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती हैं। चक्रों को संतुलित करने के लिये योग के साधन आसन, प्राणायाम, मुद्रा, ध्यान, बीज मंत्रों का जाप शामिल है इन अभ्यासो के माध्यम से चक्रों को संतुलित करके मानसिक स्वास्थ्य में स्थिरता, भावनात्मक स्थिरता, आत्मविश्वास, स्पष्ट संचार और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है |
Keywords मुख्य बिंदु : मानसिक स्वास्थ्य, चक्र, भावनात्मक स्थिरता, उपनिषद, ऊर्जा केंद्र |
Published In Volume 8, Issue 3, May-June 2026
Published On 2026-05-22

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