International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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भारत में विस्थापन एवं पुनर्वास नीतियों का मूल्यांकन: एक संक्षिप्त अध्ययन

Author(s) Mrs Meenaxi Kori, डॉ.एस.एस. ठाकुर
Country India
Abstract सारांश (Abstract)
भारत में विकास परियोजनाओं—जैसे बाँध, औद्योगिक विस्तार, खनन तथा अवसंरचना निर्माण—के कारण बड़े पैमाने पर विस्थापन की समस्या उत्पन्न हुई है। प्रारंभिक समय में भूमि अधिग्रहण से संबंधित नीतियाँ मुख्यतः राज्य के हितों पर आधारित थीं, जिनमें पुनर्वास और सामाजिक न्याय के पहलुओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। 1894 का भूमि अधिग्रहण अधिनियम इसी दृष्टिकोण का उदाहरण है, जिसके अंतर्गत प्रभावित समुदायों को केवल सीमित मुआवज़ा दिया जाता था।
समय के साथ 2003 और 2007 की राष्ट्रीय पुनर्वास नीतियों तथा अंततः Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013 के माध्यम से पुनर्वास को अधिक मानवीय और अधिकार-आधारित दृष्टिकोण प्रदान किया गया। इन नीतियों में सामाजिक प्रभाव आकलन, आजीविका पुनर्स्थापन और कमजोर वर्गों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान जोड़े गए।
हालाँकि, विभिन्न परियोजनाओं—जैसे सरदार सरोवर बाँध और टिहरी बाँध के उदाहरणों से यह स्पष्ट होता है कि नीतियों के बावजूद क्रियान्वयन में अनेक समस्याएँ बनी हुई हैं। पुनर्वास में देरी, आजीविका की कमी और सामाजिक-सांस्कृतिक विघटन जैसी चुनौतियाँ आज भी मौजूद हैं। अतः यह अध्ययन दर्शाता है कि भारत में पुनर्वास नीतियाँ सिद्धांत रूप में प्रगतिशील हैं, परंतु उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशासनिक सुधार, सामुदायिक भागीदारी और आजीविका-आधारित दृष्टिकोण को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
Keywords विस्थापन, सामाजिक न्याय, विकास, पुनर्वास -नीति
Field Sociology
Published In Volume 8, Issue 3, May-June 2026
Published On 2026-06-06

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