International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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भारत की पड़ोसी प्रथम नीति और दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग की चुनौतियाँ

Author(s) प्रगति घुणावत
Country India
Abstract प्रस्तुत शोध-पत्र भारत की “पड़ोसी प्रथम नीति” (Neighbourhood First Policy) और दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग की संरचनात्मक चुनौतियों के बीच के अंतर्विरोध का विश्लेषण करता है। इसका मूल उद्देश्य यह समझना है कि भारत द्वारा सतत प्रयासों के बावजूद दक्षिण एशिया विश्व के सर्वाधिक अल्प-एकीकृत क्षेत्रों में से एक क्यों बना हुआ है, जहाँ अंतर-क्षेत्रीय व्यापार कुल व्यापार के मात्र पाँच प्रतिशत के आसपास ठहरा हुआ है, जबकि पूर्वी एशिया में यह लगभग पचास प्रतिशत है (World Bank, 2018)। शोध की पृष्ठभूमि स्वतंत्रता के बाद भारत की क्षेत्रीय कूटनीति, पंचशील, गुटनिरपेक्षता, गुजराल सिद्धांत और 2014 के बाद की पड़ोसी प्रथम नीति, के वैचारिक विकास में निहित है। मुख्य तर्क यह है कि क्षेत्रीय एकीकरण की विफलता किसी एकल कारक का परिणाम नहीं, बल्कि भारत-पाकिस्तान संरचनात्मक प्रतिद्वंद्विता, चीन की बढ़ती उपस्थिति, छोटे पड़ोसी देशों की संप्रभुता-संवेदनशीलता, और संस्थागत दुर्बलता के संयुक्त प्रभाव का परिणाम है। यह अध्ययन गुणात्मक एवं विश्लेषणात्मक पद्धति पर आधारित है तथा द्वितीयक स्रोतों, सरकारी दस्तावेज़ों, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की रिपोर्टों और अकादमिक शोध, का उपयोग करता है। निष्कर्ष यह है कि भारत का क्षेत्रीय नेतृत्व अपरिहार्य है, परंतु इसकी सार्थकता आकार और शक्ति से नहीं, बल्कि विश्वास, उदारता और परिणामोन्मुख सहयोग से निर्धारित होगी।
Keywords पड़ोसी प्रथम नीति, दक्षिण एशिया, क्षेत्रीय सहयोग, भारतीय विदेश नीति, SAARC, BIMSTEC, BBIN, भू-राजनीति, चीन कारक, संपर्कता।
Published In Volume 8, Issue 3, May-June 2026
Published On 2026-06-18
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i03.81785

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