International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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वर्तमान परिपेक्ष्य में वैदिक क़ालीन शिक्षा की उपादेयता l

Author(s) Dr. RENU KUMARI
Country India
Abstract आज के युग में नैतिक मूल्यों का ह्रास होता जा रहा है। वैदिक शिक्षा सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचय, तप, दया और क्षमा जैसे गुणों को केंद्र मे रखती है। इससे व्यक्ति मनैतिक एवं चारित्रिक बल का विकास होता है। वैदिक शिक्षा केवल किताबी ज्ञान नहीं थी, बल्कि यह शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास पर बल देती थी। आज की शिक्षा प्रणाली में जहाँ केवल अंकों की होड है, वहाँ वैदिक दृष्टिकोण से संपूर्ण विकास को संभव बनाया जा सकता है। वैदिक शिक्षा विद्या अमृतअश्नुतेष की भावना से प्रेरित है, जिसमें ज्ञान को मोक्ष (आध्यात्मिक मुक्ति) तक पहुँचाने का साधन माना गया है। यह शिक्षा व्यक्ति को केवल जीविकोपार्जन नहीं सिखाती, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाती है। गुरुकुल प्रणाली में गुरु और शिष्य का संबंध अत्यंत घनिष्ठ होता था। आज के भीड़-भाड़ वाले स्कूंलो में यह व्यक्तिगत शिक्षण संभव नही हो पाता। वैदिक शिक्षा की यह विशेषता आज कशिक्षण संस्थानों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बन सकती है। वैदिक शिक्षा प्रकृति के साथ समन्वय पर बल देती थी। आज जब पर्यावरण संकट गहराता जा रहा है, वैदिक शिक्षा हमें प्रकृति के संरक्षण और संतुलन की भावना सिखा सकती है। वर्तमान समय में मानसिक तनाव और चिंता एक आम समस्या बन चुकी है। वैदिक शिक्षा ध्यान, प्रार्थना, और स्वाध्याय द्वारा आत्म-ज्ञान को बढावा देती है, जिससे मानसिक शांति और संतुलन प्राप्त होता है। वैदिक काल में शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति को समाज के प्रति उत्तरदायी बनाना था। आज के युग में जब व्यक्ति आत्मकेंद्रित होता जा रहा है, तब वैदिक शिक्षा सेवा, त्याग और कर्तव्य भावना को पुनर्जीवित किया जा सकता है।
Keywords वैदिक कालीन शिक्षा, वर्तमान शिक्षा
Field Sociology > Education
Published In Volume 8, Issue 4, July-August 2026
Published On 2026-07-03
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i04.81898

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