International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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देशभक्त और बहिष्कृत: राष्ट्रवादी आंदोलन के दौरान उत्तर प्रदेश में महिला कैदियों का स्तरीकरण

Author(s) Dr. Priyanka Tiwari
Country India
Abstract भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहासलेखन में महिलाओं की भागीदारी का मूल्यांकन लंबे समय तक केवल अभिजात्य वर्ग की महिलाओं, उनके द्वारा किए गए सार्वजनिक प्रदर्शनों और उनके त्याग तक ही सीमित रहा है। हालाँकि, इतिहास के इस आख्यान में एक अत्यंत महत्वपूर्ण लेकिन उपेक्षित पहलू महिलाओं का औपनिवेशिक कारावास और जेल की चारदीवारी के भीतर उनका मनोवैज्ञानिक, शारीरिक और सामाजिक संघर्ष रहा है। यह विस्तृत शोध पत्र उत्तर प्रदेश (तत्कालीन संयुक्त प्रांत) के विशेष संदर्भ में औपनिवेशिक जेल प्रणाली के भीतर महिला कैदियों के स्तरीकरण, उनके कटु अनुभवों, और उनके अदम्य प्रतिरोध का गहन विश्लेषण करता है। यह अध्ययन दर्शाता है कि औपनिवेशिक ब्रिटिश राज्य ने राधिका सिंघा के 'कानून की तानाशाही' के सिद्धांत का उपयोग करते हुए राजनीतिक असंतोष को एक सामान्य आपराधिक कृत्य की श्रेणी में डाल दिया। इसके अतिरिक्त, जेलों में ए, बी, और सी वर्गों का निर्माण केवल प्रशासनिक सुविधा नहीं थी, बल्कि यह नस्ल, वर्ग और जाति के आधार पर भारतीय समाज को विभाजित करने की एक सोची-समझी शाही रणनीति थी। उर्मिला शास्त्री, विजयलक्ष्मी पंडित, राजकुमारी गुप्ता, नानीबाला देवी, और सत्यवती देवी जैसी महिलाओं के संस्मरणों, डायरियों और ऐतिहासिक साक्ष्यों का उपयोग करते हुए, यह पत्र स्पष्ट करता है कि कैसे महिला राजनीतिक कैदियों ने औपनिवेशिक उत्पीड़न और पितृसत्तात्मक सामाजिक बहिष्कार (जैसे समाज और परिवार द्वारा त्याग दिया जाना) के दोहरे मोर्चे पर लड़ाई लड़ी। इसके साथ ही, यह शोध 'राजनीतिक' और 'सामान्य' महिला कैदियों (जो अक्सर हाशिए पर रहने वाले दलित, आदिवासी या गरीब तबके से थीं) के बीच के कृत्रिम विभाजन और उनके अंतर्संबंधों का भी आलोचनात्मक मूल्यांकन करता है। यह पत्र यह निष्कर्ष निकालता है कि औपनिवेशिक जेल, जिसे ब्रिटिश सत्ता द्वारा अपमान और नियंत्रण के साधन के रूप में डिज़ाइन किया गया था, अनजाने में महिलाओं के लिए राजनीतिक चेतना, नारीवादी एकजुटता और पितृसत्तात्मक सीमाओं के अतिक्रमण का एक अनूठा केंद्र बन गया। इसके अतिरिक्त, यह शोध औपनिवेशिक जेल नीतियों की उत्तर-औपनिवेशिक निरंतरता का भी परीक्षण करता है, जहाँ आधुनिक भारतीय राज्य आज भी राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए उन्हीं दमनकारी औपनिवेशिक रणनीतियों का उपयोग कर रहा है।
Keywords राष्ट्रवादी आंदोलन, महिला कैदी, औपनिवेशिक जेल प्रणाली, स्तरीकरण, लिंग और वर्ग, राजनीतिक कैदी, सविनय अवज्ञा, सामाजिक बहिष्कार
Field Sociology > Archaeology / History
Published In Volume 8, Issue 4, July-August 2026
Published On 2026-07-12
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i04.83562

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