International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160   •   Impact Factor: 9.24

A Widely Indexed Open Access Peer Reviewed Multidisciplinary Bi-monthly Scholarly International Journal

Call for Paper Volume 8, Issue 5 (September-October 2026) Submit your research before last 3 days of October to publish your research paper in the issue of September-October.

ग्रामीण एवं शहरी संदर्भ में विधवा महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक स्थिति: स्त्री-विमर्श के परिप्रेक्ष्य में एक तुलनात्मक अध्ययन

Author(s) देवेन्द्र कुमार, प्रो. ध्रुव कुमार त्रिपाठी
Country India
Abstract भारतीय समाज में विधवा होना केवल वैवाहिक स्थिति का परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह महिला की सामाजिक पहचान, आर्थिक सुरक्षा, पारिवारिक अधिकार, सांस्कृतिक सहभागिता और आत्मसम्मान को पुनर्गठित करने वाली एक जटिल प्रक्रिया है। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी संदर्भों में विधवा महिलाओं की स्थिति का स्त्री-विमर्शात्मक तुलनात्मक विश्लेषण करना है। अध्ययन वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक प्रकृति का है और जनगणना, सरकारी रिपोर्टों, विधिक दस्तावेजों तथा प्रकाशित शोध-अध्ययनों जैसे द्वितीयक स्रोतों पर आधारित है। विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि ग्रामीण विधवाओं की समस्याएँ भूमि-अधिकार, कृषि पर निर्भरता, जाति-आधारित नियंत्रण, स्थानीय रूढ़ियों, सीमित गतिशीलता और प्रशासनिक पहुँच की कमी से गहराई से जुड़ी हैं। दूसरी ओर, शहरी विधवाओं को रोजगार एवं संस्थागत सेवाओं के अपेक्षाकृत अधिक अवसर मिलते हैं, परंतु अनौपचारिक काम, ऊँचा जीवन-यापन व्यय, आवास-असुरक्षा, सामाजिक एकाकीपन और डिजिटल प्रक्रियाओं की जटिलता उनकी असुरक्षा को नया रूप देती है। दोनों संदर्भों में पितृसत्ता, आयु, जाति, वर्ग, शिक्षा, मातृत्व और संपत्ति से संबंध महिला के अनुभव को प्रभावित करते हैं। अध्ययन का केंद्रीय निष्कर्ष है कि विधवा महिलाओं को केवल पेंशन-लाभार्थी या करुणा की पात्र मानने के स्थान पर अधिकार-संपन्न नागरिक, संपत्ति-धारक, श्रमिक और निर्णयकर्ता के रूप में स्वीकार करना आवश्यक है।
Keywords विधवा महिलाएँ, ग्रामीण समाज, शहरी समाज, स्त्री-विमर्श, पितृसत्ता, सामाजिक बहिष्करण, आर्थिक सशक्तीकरण।
Published In Volume 8, Issue 4, July-August 2026
Published On 2026-07-18

Share this