International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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पर्यावरण संरक्षण की पारम्परिक अवधारणा - छत्तीसगढ़ की भुंजिया जनजाति के विशेष सन्दर्भ में

Author(s) Ms. सोमप्रभा डहरे, Dr. अनामिका शर्मा
Country India
Abstract “पर्यावरण ही स्थायी अर्थ व्यवस्था है” --- सुंदरलाल बहुगुणा
छत्तीसगढ़ प्रकृति की सुन्दर गोद में बसा, पर्वतों, पहाड़ों, जंगलों से घिरा हुआ अपनी अलग पहचान लिए स्थापित है l भुंजिया जनजाति छत्तीसगढ़ की एक प्रमुख आदिम जनजाति है l भुंजिया जनजाति विशेष पिछड़ी जनजाति है, जो पूर्णतः जंगल और प्रकृति से जुड़ा तथा उसी में रचा बसा है l भुंजिया जनजाति की धार्मिक-मान्यताएं, सामाजिक-परम्पराएं, आजीविका तथा सांस्कृतिक व्यवहार पर्यावरण संरक्षण की पारस्परिक अवधारणा को प्रतिबिंबित करता है l जंगल तथा प्रकृति को अपनी जिंदगी मान चुकी भुंजिया जनजाति पर्यावरण संरक्षण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है l
Keywords भुंजिया जनजाति, पर्यावरण संरक्षण, पारम्परिक अवधारणा, प्राकृतिक संसाधन, छत्तीसगढ़, ज्ञान का संरक्षण
Field Sociology > Archaeology / History
Published In Volume 8, Issue 4, July-August 2026
Published On 2026-07-27

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