International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक अस्मिता और सिनेमाई भाषा: कमाल अमरोही और विशाल भारद्वाज के सिनेमा का तुलनात्मक अध्ययन

Author(s) Mr. Akhilesh Verma, Dr. Prithvi Sanger
Country India
Abstract प्रस्तुत शोध पत्र हिंदी सिनेमा के दो प्रमुख निर्देशकों कमाल अमरोही और विशाल भारद्वाज की सिनेमाई दृष्टि तथा उनके सौंदर्यबोध का एक तुलनात्मक अध्ययन है। यह शोध मुख्य रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को केंद्र में रखते हुए अमरोही की पाकीज़ा और भारद्वाज की ओमकारा का विश्लेषणात्मक मूल्यांकन करता है। अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि एक ही भौगोलिक क्षेत्र से संबंध रखने के बावजूद इन दोनों रचनाकारों की सिनेमाई भाषा में गहरा वैचारिक और सांस्कृतिक अंतर मौजूद है। एक ओर कमाल अमरोही हैं जो लखनऊ और अमरोहा की गंगा जमुनी तहज़ीब, नज़ाकत और सूफियाना रिवायतों का प्रतिनिधित्व करते हुए अपने सिनेमा में अतीत की स्मृतियों व काव्यात्मक रूमानियत से बुना एक स्वप्निल संसार रचते हैं। वहीं दूसरी ओर विशाल भारद्वाज मेरठ और मुजफ्फरनगर पट्टी के खुरदरे यथार्थ को पर्दे पर उकेरते हैं। उनके सिनेमा में ठेठ खड़ी बोली, जातीय हिंसा, बाहुबली संस्कृति और राजनीतिक दांव पेंच किसी प्रामाणिक दस्तावेज़ की तरह नज़र आते हैं। यह अध्ययन प्रमाणित करता है कि कोई भी निर्देशक अपने क्षेत्रीय और सांस्कृतिक परिवेश से अछूता नहीं रह सकता। अमरोही जहाँ अतीत की रोमानियत के संरक्षक प्रतीत होते हैं, वहीं भारद्वाज वर्तमान के कठोर यथार्थ के मुखर प्रवक्ता हैं। इन दो विपरीत सिनेमाई आयामों का यह विश्लेषण हिंदी सिनेमा में नज़ाकत से सियासत तक हुए गहरे सांस्कृतिक संक्रमण को बहुत ही जीवंत रूप में रेखांकित करता है।
Keywords पश्चिमी उत्तर प्रदेश, सांस्कृतिक अस्मिता, सिनेमाई भाषा, स्त्री-विमर्श, पाकीज़ा, ओमकारा, दृश्य-विधान, बाहुबली संस्कृति, खड़ी बोली।
Field Arts > Movies / Music / TV
Published In Volume 8, Issue 5, September-October 2026
Published On 2026-09-08
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i05.84837

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