International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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रामायण के प्रमुख पात्रों का मनोविश्लेषणात्मक अध्ययन : मानवीय व्यक्तित्व और नैतिक चेतना के संदर्भ में

Author(s) डॉ. कविता सिंह
Country India
Abstract रामायण भारतीय संस्कृति, साहित्य और जीवन-दर्शन का एक अमूल्य महाकाव्य है, जिसमें मानवीय व्यक्तित्व, नैतिक मूल्यों, पारिवारिक संबंधों तथा सामाजिक उत्तरदायित्व का अत्यंत प्रभावशाली चित्रण प्राप्त होता है। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य रामायण के प्रमुख पात्रों का मनोविश्लेषणात्मक दृष्टिकोण से अध्ययन करना है, ताकि उनके व्यक्तित्व, व्यवहार, निर्णय, मानसिक संघर्ष तथा भावनात्मक संरचना को गहनता से समझा जा सके। इस अध्ययन में श्रीराम, सीता, लक्ष्मण, भरत, हनुमान, विभीषण, रावण, कैकेयी, मंथरा तथा शूर्पणखा जैसे प्रमुख पात्रों के चरित्र का विश्लेषण आधुनिक मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांतों तथा भारतीय मनोवैज्ञानिक चिंतन के आलोक में किया गया है। अध्ययन में यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि प्रत्येक पात्र का व्यवहार केवल बाह्य परिस्थितियों का परिणाम नहीं है, बल्कि उसके अंतर्मन, नैतिक चेतना, भावनात्मक अनुभवों तथा सामाजिक परिवेश से भी गहराई से प्रभावित होता है। शोध में सिग्मंड फ़्रायड, कार्ल गुस्ताव युंग, अल्फ्रेड एडलर तथा भारतीय दार्शनिक परंपरा के मनोवैज्ञानिक पक्षों का समन्वित उपयोग करते हुए पात्रों के व्यक्तित्व की बहुआयामी व्याख्या प्रस्तुत की गई है। अध्ययन से यह निष्कर्ष प्राप्त होता है कि रामायण के पात्र आदर्श और अनादर्श के स्थिर प्रतिमान मात्र नहीं हैं, बल्कि वे मानवीय मन की जटिलताओं, नैतिक द्वंद्वों, भावनात्मक संघर्षों तथा आत्मविकास की प्रक्रियाओं के जीवंत प्रतिनिधि हैं। वर्तमान सामाजिक परिप्रेक्ष्य में भी इन पात्रों का मनोविश्लेषणात्मक अध्ययन नेतृत्व, पारिवारिक संबंधों, नैतिक निर्णय, व्यक्तित्व-विकास तथा मानसिक संतुलन की दृष्टि से अत्यंत प्रासंगिक सिद्ध होता है। यह शोध रामायण के अध्ययन को एक नवीन मनोवैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य प्रदान करते हुए भारतीय महाकाव्य साहित्य की समकालीन उपयोगिता को भी रेखांकित करता है।
Keywords रामायण, मनोविश्लेषण, व्यक्तित्व, श्रीराम, सीता, रावण, हनुमान, कैकेयी, मानसिक संघर्ष, नैतिक चेतना, भारतीय मनोविज्ञान, व्यक्तित्व-विकास, मानवीय व्यवहार, सांस्कृतिक मूल्य.
Published In Volume 2, Issue 3, May-June 2020
Published On 2020-06-09
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2020.v02i03.84933

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