International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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टिकाऊ कृषि पद्धतियां और मृदा स्वास्थ्य

Author(s) Dr Shivandra Pratap Singh, Dr Raj Kumar Gupta
Country India
Abstract सारांश

टिकाऊ कृषि या सतत कृषि का तात्पर्य कृषि और खाद्य उत्पादन के लिए एक समग्र दृष्टिकोण से है। जिसका उद्देश्य कृषि प्रणालियों की दीर्घकालिक व्यवहार्यता सुनिश्चित करते हुए तथा भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करते हुए भोजन एवं फाइबर की वर्तमान जरुरतों को पूरा करना है। पर्यावरण पर कृषि गतिविधियों के नकारात्मक प्रभावों को कम करने का एक संभावित समाधान टिकाऊ कृषि तकनीक का उपयोग है। मृदा स्वास्थ मिट्टी की वह क्षमता है जो पारिस्थितिकी और भूमि उपयोग सीमाओं के भीतर एक आवश्यक जीवित प्रणाली के रूप में चलती रहती है जैविक उत्पादकता को बढ़ाती है हवा और पानी की गुणवत्ता को संरक्षित करती है और लोगों,जानवरों एवं पौधों के स्वास्थ्य को बढ़ाती है। आधुनिक कृषि में मृदा स्वास्थ सुनिश्चित करना और प्रभावी उर्वरता प्रबंधन संधारणीय फसल उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण के लिए सर्वोपरि है।कृषि प्रणालियों में मृदा प्रबंधन के पारंपरिक और अभिनव दृष्टिकोणों में जैविक संशोधन कवर क्रापिंग,फसल चक्रण, कम जुताई और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन जैसी कई प्रथाएं शामिल है। कृषि परंपराओं में गहराई से निहित यह प्रथाएं मृदा संरक्षण को बढ़ाने पोषक चक्रण को बढ़ावा देने और लाभकारी मृदा सूक्ष्म जीव समुदायों को बढ़ावा देने के लिए दिखाई देती है। जिससे दीर्घकालिक मृदा स्वास्थ एवं उत्पादकता में योगदान मिलता है। खेती में संधारणीयता ज्यादातर मिट्टी के स्वास्थ्य पर निर्भर करती है जो पारिस्थितिक स्थिति और भूमिउपयोग सीमाओं के भीतर कार्य करने की मिट्टी की क्षमता है। यह सामान्य कल्याण को बढ़ाता है हवा और पानी की शुद्धता बनाए रखता है और जैविक उत्पादकता का समर्थन करता है। आधुनिक कृषि गहनता के कारण मिट्टी के कार्यों में कमी का पारिस्थितिकी तंत्र और दीर्घकालिक उत्पादकता पर प्रभाव पड़ता है। टिकाऊ खेती का लक्ष्य मिट्टी की उर्वरता और कार्बनिक पदार्थ बढ़ाना है। प्रमुख पद्धतियों में कार्बनिक खेती,संरक्षण खेती,एकीकृत कीट प्रबंधन(IPM) शामिल हैं। यह तकनीकें मिट्टी की उर्वरता,संरचना और जैवविविधता में सुधार करती हैं।
Keywords मुख्य शब्द -मृदा स्वास्थ्य, टिकाऊ कृषि, जैविक संसाधन,कवर क्रापिंग, फसल चक्र, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, कार्बन कृषि, संरक्षण खेती,पर्माकल्चर, कृषि वानिकी, धान सघनीकरण विधि,बायो-डायनमिक कृषि, प्राकृतिक खेती, जीरो बजट कृषि, जैविक कृषि।
Published In Volume 8, Issue 4, July-August 2026
Published On 2026-08-05
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i04.85063

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