International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160   •   Impact Factor: 9.24

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मानव द्वारा प्राकृतिक, सामाजिक व सांस्कृतिक पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का विश्लेषण

Author(s) Mrs. Monika Kushwaha
Country India
Abstract पर्यावरण को भौतिक, सामाजिक व सांस्कृतिक तीनों रूपों में देखा जाता है, जिसके अधीन जीव व समस्त मानव जाति रहते हैं। वे सभी विभिन्न संसाधनों को प्राप्त करने के भिन्न-भिन्न तरीके अपनाते रहते हैं। प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग हेतु मानव लगातार प्रकृति से छेड़छाड़ कर रहा है, जिसका दुष्परिणाम समस्त मानव जाति को भुगतना होगा। प्रकृति हमारे शारीरिक स्वास्थ्य में वृद्धि के साथ-साथ हमारा मानसिक स्वास्थ्य भी उत्तम रखती है क्योंकि मस्तिष्क के स्वस्थ होने से ही जन कल्याण सम्भव है। प्रकृति हमें तनावमुक्त रहने में हमारी सहायता करती है। हमें प्रकृति माँ से किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए तथा प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने में अपना योगदान अवश्य देना चाहिए। यह संतुलन तभी बना रहेगा जब भौतिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक तीनों ही वातावरण शुद्ध होंगे। मानव निर्मित वातावरण का मानसिक स्वास्थ्य पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। साथ ही, भौतिक पर्यावरण, जिसे हम आमतौर पर सामाजिक पर्यावरण ही कहते हैं, इसका भी प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष प्रभाव मानव जीवन पर पड़ता है। हमें मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रकृति का संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता है और इसके लिए विश्व स्तर पर एकजुट होकर कार्य करने की आवश्यकता है। यह शोध पर्यावरण तथा मानव जीवन के बीच संबंध पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव तथा वैचारिक समस्याओं को रेखांकित करता है, साथ ही सामाजिक सम्बन्ध को सुदृढ़ बनाए रखने में प्रकृति का क्या योगदान रहता है, इसकी भी समीक्षा करता है।
Keywords पर्यावरण, समाज, संस्कृति, भौतिक, प्रभाव, दुष्परिणाम।
Field Sociology
Published In Volume 8, Issue 4, July-August 2026
Published On 2026-08-04
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i04.85075

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