International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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बहुभाषी शिक्षा में हिंदी सीखने की चुनौतियाँ कक्षा 6 से 10 के विद्यार्थियों पर आधारित एक अध्ययन

Author(s) Ms. Latangi R, Ms. Vidhya Patel, Ms. Mridula Vijayakumar
Country India
Abstract सार (Abstract)
भारत एक बहुभाषी एवं बहुसांस्कृतिक देश है, जहाँ विभिन्न राज्यों में अनेक भाषाएँ एवं बोलियाँ प्रचलित हैं। इस भाषाई विविधता के कारण विद्यार्थियों को एक से अधिक भाषाओं का अध्ययन करना पड़ता है। हिंदी भारत की राजभाषा होने के साथ-साथ देश के विभिन्न भागों के लोगों के बीच संपर्क स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके बावजूद अनेक विद्यार्थियों, विशेषकर गैर-हिंदी भाषी पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों, के लिए हिंदी भाषा का अध्ययन चुनौतीपूर्ण सिद्ध होता है। मातृभाषा का प्रभाव, कठिन व्याकरण, सीमित शब्दावली, शुद्ध वर्तनी लिखने में कठिनाई, मात्राओं का सही प्रयोग, नियमित अभ्यास का अभाव तथा हिंदी बोलने का सीमित वातावरण हिंदी अधिगम में प्रमुख बाधाओं के रूप में सामने आते हैं। इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए प्रस्तुत शोध का संचालन किया गया।
इस शोध का मुख्य उद्देश्य कक्षा 6 से 10 तक के विद्यार्थियों में हिंदी सीखने के दौरान आने वाली कठिनाइयों का अध्ययन करना, उनके प्रमुख कारणों की पहचान करना तथा हिंदी शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत करना है। अध्ययन में यह भी समझने का प्रयास किया गया कि विद्यार्थियों की मातृभाषा, विद्यालयी वातावरण तथा शिक्षण पद्धतियाँ हिंदी भाषा सीखने की प्रक्रिया को किस प्रकार प्रभावित करती हैं।

प्रस्तुत अध्ययन के लिए केआरएम पब्लिक स्कूल के कक्षा 6 से 10 तक के कुल 700 विद्यार्थियों का प्रश्नावली-आधारित सर्वेक्षण किया गया। प्रत्येक कक्षा से समान संख्या में विद्यार्थियों का चयन कर उनके उत्तरों का विश्लेषण किया गया। सर्वेक्षण के अनुसार 700 में से 550 विद्यार्थियों ने हिंदी को सीखने में कठिन भाषा माना, जबकि 150 विद्यार्थियों ने इसे कठिन नहीं माना। प्राप्त आँकड़ों से यह स्पष्ट हुआ कि हिंदी सीखने में सबसे अधिक कठिनाई व्याकरण (180 विद्यार्थी) में होती है। इसके अतिरिक्त शब्दावली (140), वर्तनी (130), पठन कौशल (100), बोलने का कौशल (90) तथा अन्य कारणों (60) को भी विद्यार्थियों ने प्रमुख कठिनाइयों के रूप में चिन्हित किया। इन परिणामों से यह भी स्पष्ट हुआ कि जिन विद्यार्थियों की मातृभाषा हिंदी नहीं है, उन्हें हिंदी के उच्चारण, शब्दों के प्रयोग तथा वाक्य संरचना को समझने में अपेक्षाकृत अधिक समय और अभ्यास की आवश्यकता होती है।

अध्ययन के निष्कर्षों से यह ज्ञात हुआ कि यदि विद्यालयों में गतिविधि-आधारित, संवादात्मक तथा छात्र-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों को अपनाया जाए, नियमित भाषा-अभ्यास को प्रोत्साहित किया जाए तथा अभिभावकों और शिक्षकों द्वारा सकारात्मक एवं सहयोगात्मक वातावरण प्रदान किया जाए, तो विद्यार्थियों की हिंदी भाषा दक्षता में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है। हिंदी कहानी-पुस्तकों का पठन, दैनिक वार्तालाप, भाषा खेल, डिजिटल शिक्षण सामग्री तथा निरंतर अभ्यास विद्यार्थियों की रुचि और आत्मविश्वास को बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं।

यह शोध बहुभाषी शिक्षा के संदर्भ में हिंदी भाषा शिक्षण की वर्तमान चुनौतियों को समझने का एक प्रयास है। इसके निष्कर्ष शिक्षकों, अभिभावकों, विद्यालय प्रशासकों तथा शिक्षा-नीति निर्माताओं के लिए उपयोगी हो सकते हैं। साथ ही, यह अध्ययन भविष्य में भाषा-अधिगम एवं बहुभाषी शिक्षा से संबंधित अनुसंधानों के लिए एक आधार प्रदान करता है तथा हिंदी शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार हेतु व्यावहारिक दिशा-निर्देश प्रस्तुत करता है।
Keywords हिंदी भाषा अधिग, बहुभाषी शिक्षा, गैर-हिंदी भाषी विद्यार्थी, शिक्षण पद्धतियाँ, प्रश्नावली सर्वेक्षण, मातृभाषा का प्रभाव.
Field Sociology > Linguistic / Literature
Published In Volume 8, Issue 4, July-August 2026
Published On 2026-08-16

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