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E-ISSN: 2582-2160   •   Impact Factor: 9.24

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महायोगी गुरु गोरखनाथ एवं बाबा बालकनाथ : नाथ सम्प्रदाय, भारतीय सामाजिक-धार्मिक जीवन तथा लोकपरम्परा का अध्ययन

Author(s) Dr. Chaman Lal Banga
Country India
Abstract हमारे देश में अनेक देवी-देवताओं की उपासना के साथ-साथ नवनाथ तथा उनसे विकसित चौरासी सिद्ध नाथों की परम्परा का भी विशेष महत्व है। लोकमान्यता के अनुसार ये सिद्ध योगबल से दीर्घायु होते हैं और आज भी अपने सूक्ष्म स्वरूप में लोककल्याण के लिए विचरण करते हैं। नाथ परम्परा में गुरु गोरखनाथ का स्थान सर्वोपरि माना जाता है। इसी प्रकार चौरासी सिद्धों में बाबा बालक नाथ का नाम अत्यंत श्रद्धा और सम्मान के साथ लिया जाता है। भारत के प्रमुख तीर्थस्थलों में अमरनाथ मंदिर, केदारनाथ मंदिर और बद्रीनाथ मंदिर जैसे पवित्र धाम विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। हिमाचल प्रदेश देवभूमि के रूप में विख्यात है, जहाँ देवी-देवताओं, सिद्धों और लोकदेवताओं के प्रति लोगों की अटूट श्रद्धा और आस्था देखने को मिलती है। यहाँ की जनश्रुतियों के अनुसार देवी-देवताओं का हिमालय क्षेत्र में निरंतर आगमन और विचरण होता रहा है। हिन्दू धर्म में देवताओं को परमात्मा के दिव्य स्वरूप का लौकिक प्रतिनिधि माना गया है। भारतीय संस्कृति का प्रत्येक पक्ष किसी न किसी रूप में धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक परम्पराओं से जुड़ा हुआ है। हिमाचल प्रदेश में सिद्धों तथा लोकदेवताओं की परम्परा प्राचीन काल से आज तक अविच्छिन्न रूप से चली आ रही है, जो यहाँ की सांस्कृतिक विरासत और लोकविश्वास का महत्वपूर्ण आधार है। भारतीय सभ्यता में नाथ सम्प्रदाय योग, तप, आध्यात्मिक साधना तथा सामाजिक समरसता की एक महत्त्वपूर्ण परम्परा है। इस परम्परा का विकास आदिनाथ (भगवान शिव) से प्रारम्भ होकर मत्स्येन्द्रनाथ तथा महायोगी गुरु गोरखनाथ के माध्यम से व्यापक रूप में हुआ। गुरु गोरखनाथ ने नाथ सम्प्रदाय को संगठित स्वरूप प्रदान करते हुए हठयोग, गुरु-शिष्य परम्परा, नैतिक जीवन तथा सामाजिक समरसता का संदेश दिया। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य गुरु गोरखनाथ के सामाजिक एवं धार्मिक योगदान तथा बाबा बालकनाथ से संबंधित लोकपरम्पराओं का विश्लेषण करना है। अध्ययन में ऐतिहासिक ग्रन्थों, गोरखवाणी, नाथ साहित्य तथा हिमाचल प्रदेश में प्रचलित लोककथाओं का गुणात्मक विश्लेषण किया गया है। अध्ययन से ज्ञात होता है कि गुरु गोरखनाथ ने भारतीय समाज में योग-साधना को जनसामान्य तक पहुँचाने, जातीय एवं सामाजिक भेदभाव को कम करने तथा गुरु-परम्परा को सुदृढ़ बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। दूसरी ओर बाबा बालकनाथ से संबंधित कथाएँ हिमाचल प्रदेश की लोक-सांस्कृतिक विरासत का महत्त्वपूर्ण भाग हैं। इनमें भक्ति, तप, गुरु-भक्ति तथा लोकविश्वास के अनेक आयाम दिखाई देते हैं। यद्यपि इन कथाओं के ऐतिहासिक प्रमाण सीमित हैं, तथापि धार्मिक आस्था एवं सांस्कृतिक पहचान के निर्माण में इनका विशेष योगदान है।
Keywords नाथ सम्प्रदाय, गुरु गोरखनाथ, बाबा बालकनाथ, हठयोग, लोककथा, भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता।
Published In Volume 8, Issue 4, July-August 2026
Published On 2026-08-14

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