International Journal For Multidisciplinary Research
E-ISSN: 2582-2160
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Volume 8 Issue 4
July-August 2026
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अनुसूचित जनजातियों में खाद्य और पोषण सुरक्षा अधिनियम 2012: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन – नारायणपुर जिले के विशेष सन्दर्भ में
| Author(s) | Dr. Leela Ram Sinha, Ms. Nilima Nirmalkar |
|---|---|
| Country | India |
| Abstract | शोध सार छत्तीसगढ़ राज्य में अनुसूचित जनजातियों में खाद्य और पोषण सुरक्षा अधिनियम 2012 ,एक महत्वपूर्ण योजना है | जो खाद्य सुरक्षा को निरंतर सुरक्षा प्रदान करता है ,यह भारत का पहला राज्य है ,जो खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2012 लागू होने के बाद छत्तीसगढ़ गरीबी से उबर कर सामने आया है| क्योंकि मनुष्य के मूलभूत आवश्यकताओं आवास, वस्त्र एवं भोजन तीनों की आपूर्ति व्यापक मुद्दा है | निम्न आर्थिक स्थिति के कारण वर्तमान में इन तीनों का आपूर्ति कर पाना अत्यंत कठिन कार्य फिर भी सरकार की ओर से एक छोटा सा प्रयास किया गया है | सरकार के इस कदम में मूलभूत आवश्यकताओं में से यदि किसी एक का बोझ कम होता है तो गरीबी परिवारों का आर्थिक विकास एवं जीवन स्तर में सुधार देखा जा सकता है | खाद्य और पोषण सुरक्षा तब तक अधूरी है जब तक लोगों को पौष्टिक भोजन निरंतर उपलब्ध न हो |लोगों को निरंतर पौष्टिक भोजन उपलब्ध हो सके, इसके लिए आवश्यक है कि अनाज की कीमतों में उतार-चढ़ाव ,संघर्ष या महामारी जैसे बाहरी जोखिमों के प्रभाव को कम कर इसे हर वक्त लोगों ,खासकर समाज के कमजोर तबको के लोगों की पहुंच के भीतर बनाए रखा जाए | प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई)की शुरुआत 80 करोड़ से अधिक गरीब और अत्यंत निर्धन लोगों को लाभानन्वित करने के लिए 1 जनवरी, 2023 से की गई | इस योजना के तहत अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई )और प्राथमिक घरेलू (पीएचएच) लाभार्थियों को नि:शुल्क खाद्यान्न सहायता प्रदान की जाएगी | पीएमजीकेएवाई गरीबों तक खाद्यान्न की पहुंच ,वहनीयता और उपलब्धता के मामले में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून 2013 के प्रावधानों को मजबूत करेगी |इससे देश में खाद्य और पोषण सुरक्षा को और मजबूती मिलेगी |खाद्य सुरक्षा के प्रति लोगों में जागरूकता के लिए सरकार द्वारा समय-समय पर विषय शिविर लगाकर ,टेलीविजन एवं रेडियो के साथ ही साथ इंटरनेट जैसे साधनों के प्रयोग में जागरूकता आई है |अनुसूचित जनजातियों में खाद्य सुरक्षा हेतु वितरित किए जाने वाले सामग्रियों की मात्रा एवं गुणवत्ता में पारदर्शिता से इस योजना के समुचित।क्रियाओ का वर्णन से निम्न वर्ग में गरीबी अपेक्षाकृत कम एवं आर्थिक स्तर में सुधार हुआ है |पूर्व की अपेक्षा वर्तमान में शासकीय उचित मूल्य की दुकानों की संख्या, कार्य प्रणाली संचालको में भिन्नता (यथा _स्व सहायता समूह ,वन सुरक्षा समूह, सहकारी समितियां )आदि में निरंतर सुधार से नारायणपुर में खाद्य सुरक्षा एवं महिला सशक्तिकरण का एक नया मार्ग प्रशक्त हुआ है |साथ ही महिलाओं ,बच्चों तथा किशोरियों कि कुपोषण में कमी देखा गया है | |
| Keywords | अनुसूचित जनजातियों में खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2012, पोषण स्तर, कुपोषण, जीवन स्तर,महिला सशक्तिकरण ,गरीबी उन्मूलन. |
| Field | Sociology > Economics |
| Published In | Volume 8, Issue 4, July-August 2026 |
| Published On | 2026-08-20 |
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E-ISSN 2582-2160
CrossRef DOI prefix of IJFMR is 10.36948/ijfmr
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