International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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विवाह विच्छेद की प्रक्रिया के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं की मनो-सामाजिक समस्याएँ, अधिकार और पारिवारिक न्यायालय की भूमिका: एक अध्ययन

Author(s) Ms. Shivani Singh, Dr. Ruchi Srivastav
Country India
Abstract सारांश: विवाह विच्छेद की प्रक्रिया गर्भवती महिलाओं के लिए केवल वैवाहिक संबंधों की समाप्ति का विषय नहीं है, बल्कि यह भावनात्मक, सामाजिक, आर्थिक एवं कानूनी चुनौतियों से जुड़ा एक जटिल अनुभव भी है। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य विवाह विच्छेद की प्रक्रिया के दौरान गर्भवती महिलाओं के समक्ष उत्पन्न होने वाली मनोसामाजिक समस्याओं, उनके विधिक अधिकारों तथा उनके संरक्षण में पारिवारिक न्यायालय की भूमिका का विश्लेषण करना है। गर्भवती महिलाओं को तलाक की प्रक्रिया के दौरान मानसिक तनाव, अवसाद, सामाजिक कलंक, आर्थिक असुरक्षा तथा भविष्य के प्रति अनिश्चितता जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। भारतीय विधि व्यवस्था उन्हें भरण-पोषण, चिकित्सा सहायता, घरेलू हिंसा से संरक्षण, सम्मानजनक जीवन तथा होने वाले बच्चे के हितों की रक्षा जैसे महत्वपूर्ण अधिकार प्रदान करती है। पारिवारिक न्यायालय इन अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन, अंतरिम राहत, भरण-पोषण, अभिरक्षा तथा गर्भवती महिला एवं बच्चे के सर्वोत्तम हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। तथापि, न्यायिक प्रक्रिया में विलंब, संसाधनों की कमी तथा सामाजिक पूर्वाग्रह न्याय प्राप्ति में बाधा उत्पन्न करते हैं।
Keywords मुख्य शब्द: विवाह विच्छेद, गर्भवती महिला, भरण-पोषण, पारिवारिक न्यायालय, महिलाओं का अधिकार, अभिरक्षा।
Field Sociology
Published In Volume 8, Issue 4, July-August 2026
Published On 2026-08-17

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