International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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अनामिका की कविता 'स्त्रियाँ' में स्त्री-अस्मिता का स्वर

Author(s) Dr. Preeti Kumari
Country India
Abstract यह शोध-पत्र अनामिका की कविता 'स्त्रियाँ' में अभिव्यक्त स्त्री-अस्मिता के स्वर का विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। शोध का मूल तर्क यह है कि कविता स्त्री-अस्मिता को केवल स्त्रीत्व की जैविक पहचान के रूप में नहीं, बल्कि गरिमा, स्वायत्तता, वाणी, बौद्धिक मान्यता और समान मनुष्यता की माँग के रूप में प्रस्तुत करती है। अध्ययन में विशेष रूप से कविता की क्रमिक क्रियाओं- "पढ़ा गया", "देखा गया", "सुना गया" और "भोगा गया"- का विश्लेषण किया गया है, जिनके माध्यम से स्त्री के प्रति पितृसत्तात्मक व्यवहार की संरचना उद्घाटित होती है। सिमोन द बोव्आर की सामाजिक-सांस्कृतिक निर्मिति की अवधारणा तथा हेलेन सिक्सू की स्त्री-भाषा संबंधी दृष्टि के आलोक में यह लेख यह दिखाने का प्रयास करता है कि अनामिका की कविता व्यक्तिगत पीड़ा को सामूहिक स्त्री-अनुभव में रूपांतरित करती है। कविता में उपस्थित "हम भी इंसान हैं" का स्वर स्त्री-अस्मिता को मानवीय गरिमा और समान सामाजिक स्वीकृति के प्रश्न से जोड़ता है।
Keywords स्त्री-अस्मिता, स्त्री-विमर्श, अनामिका, स्त्री-भाषा, पितृसत्ता, काव्य-भाषा
Field Sociology > Linguistic / Literature
Published In Volume 8, Issue 4, July-August 2026
Published On 2026-08-21
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i04.86212

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